मंगलवार, 16 मार्च 2021

समाज को आईना दिखाता उपन्यास जैसे थे

     जीवन की वास्तविकता को दर्शाते हुए ‘जैसे थे’ उपन्यास अपनी सजीवता और स्वाभाविकता को दुनिया की सत्यता के साथ पिरोये रखता है। यह किसी भी उपन्यास का वांछनीय तत्व होता है, जिसके बिना न तो उपन्यास की कथावस्तु का निर्माण हो सकता है और न ही चरित्रों का उद्घाटन। ‘जैसे थे’ को पढ़कर लगता है कि यह सारी घटना हमारे ही आस-पास कहीं घटित हो रही है I व्यंग्यात्मक रूप में लिखी गयी व्यस्तपुरा की कहानी हमारे जीवन की व्यस्तता की व्याख्या करती हुई असाधारण तरीके से पात्रों के सुख-दुःख को वर्णित करती है।

कड़क सिंह से लेकर चांदनी चौक के चंदू सभी पात्र पाठकों को बांधे रखने में सफल हैं। गाँव के सामान्य जीवन और शहर की भाग-दौड़ को सहजता से प्रस्तुत किया गया है, वहीं वैलेंटाइन जैसे शब्द को व्यंग्यात्मक प्रेम कहानी के रूप में चरितार्थ कर उसकी महत्ता को बताया गया है। धर्म के नाम पर लूट मचाने वाले पुजारी और खादिम की मानसिकता को बताते हुए उनकी सच्चाई सबके सामने लाने का बेहतरीन प्रयास समाज को चेतना प्रदान करने में समर्थ है।
अतएव व्यंगात्मक उपन्यास ‘जैसे थे’ समसामयिक समस्याओं और तत्संबंधी निवारण की ओर केन्द्रित है। नदी के प्रवाह की तरह कहानी आगे बढ़ती रहती है। लेखन में मारक क्षमता तभी आती है जब आपने अपने लिखे को स्वयं जिया हो या महसूस किया हो। इस उपन्यास में कुछ ठहराव है, कुछ रहस्य है तो मानवीय परिवेश एवं लोक जीवन की नई परिभाषाएं भी हैं, जो पाठकों की जिज्ञासा को बनाये रखती है। आवश्यकतानुसार शब्दों व बोलियों का सटीक चयन आत्मीयता बनाये रखते हुए समाज के कड़वे सत्य को सामने लाते हैं I वास्तव में उपन्यास  की रचना किसी निश्चित उद्देश्य के लिए की जाती है जिसमें लेखक सुमित प्रताप सिंह सफल रहे हैं।
उदाहरणार्थ उपन्यास का एक अंश- ‘अब बारी चौथे कर्मचारी की थी। अरे महाराज ! संसार की रीत है इस हाथ दें और उस हाथ लें। अब अधिकारी व्यवसायी और नेता अथवा उनके सगे सम्बन्धी हमारा ध्यान रखते हैं तो बदले में हम उनका ध्यान रखते हैं। उनके द्वारा दी गयी सहायता या सेवा के बदले हम उनके लिए कवि सम्मेलनों में भागीदारी की व्यवस्था करते हैं, उनकी उल्टी-सीधी रचनाओं को भी श्रेष्ठ साबित कर उनकी पुस्तकों का प्रकाशन करवाते हैं और समय-समय पर उनके सम्मान में उनके ऊपर केन्द्रित कार्यक्रमों का आयोजन भी करवाते हैं।
इस प्रकार प्रस्तुत उपन्यास ‘जैसे थे’ सकारात्मक रचनाधर्मिता को जीवन प्रदान करती हुई लेखनी है I लेखक सुमित प्रताप सिंह को समाज को अपनी वास्तविकता का आईना दिखाने हेतु कोटिशः बधाई। उम्मीद है कि सुमित प्रताप सिंह का साहित्यिक शुद्धि यज्ञ यूूँ ही निरंतर प्रदीप्त रहेगा।

समीक्षक - सुषमा सिंह, स्वतंत्र पत्रकार एवं ब्लॉगर


रविवार, 28 फ़रवरी 2021

खाकीधारियों ने शुरू किया पुस्तकालय अभियान


        देश के भीतर समाज की सुरक्षा व्यवस्था संभालने के साथ-साथ अब खाकी धारियों ने गाँव के नौनिहालों के अध्ययन करने के लिए पुस्तकालय के निर्माण की व्यवस्था का भी जिम्मा संभाला है। ये कार्य ग्राम पाठशाला के अंतर्गत किया जा रहा है। ग्राम पाठशाला का विचार कोविड 19 लोकडाउन के दौरान आया। लोनी कस्बे के गांव गनौली के कुछ युवा साथियों ने लॉकडाउन के दौरान ये विचार किया कि इस खाली समय का इस्तेमाल कर गांव के लिए कुछ करना चाहिए। गांव के युवा साथियों ने गांव में एक आधुनिक पुस्तकालय (लाइब्रेरी) बनाने का सुझाव इंस्पेक्टर (एनएचआरसी) श्री लाल बहार जी के सामने रखा। चूंकि इस टीम के सभी सदस्य दिल्ली पुलिस, यूपी पुलिस व अन्य संस्थाओं में काम कर रहे हैं और शिक्षा के महत्व को भली-भांति समझते हैं, उन्होंने हर संभव मदद का आश्वासन देकर पुस्तकालय का कार्य शुरू करने के लिए कहा। बस फिर क्या था, सभी ने मिलकर बहुत कम समय में एक बेहतरीन पुस्तकालय का निर्माण कर दिया। यहां देखने लायक बात ये है कि ये पुस्तकालय सरकारी जगह में, गांव वालों के सहयोग से और गांव के सर्वसमाज के लिए बनाई गई। इस पुस्तकालय में 65 बच्चों के बैठने की व्यवस्था है, लेकिन ये कैपेसिटी पहले दिन से ही कम पड़ने लगी क्योंकि आसपास के गांवो के बच्चे भी पुस्तकालय आने लगे। टीम ने बैठकर विचार किया कि क्यों ना दूसरे गांव में भी जाकर लोगों को पुस्तकालय बनाने के लिए प्रेरित किया जाए। और यहां से ही शुरुआत हुई 'ग्राम पाठशाला' मिशन की।

ग्राम पाठशाला टीम का विजन स्टेटमेंट है 'शिक्षा से रोजगार'। इसका मतलब है कि युवा कोई भी काम शुरू करने से पहले अच्छी शिक्षा ग्रहण करें ताकि एक शिक्षित समाज का निर्माण हो और समाज को नई दिशा मिले। ग्राम पाठशाला टीम का मिशन है 'गांव में, गांव के लोगों द्वारा, गांव के लोगों के लिए पुस्तकालय' बनाने के लिए गांव के लोगों से अपील करना। ग्राम पाठशाला टीम का मूलभूत सिद्धांत है कि वह किसी भी प्रकार के आर्थिक लेन-देन व किताबों के वितरण में शामिल नहीं होगी। गांव के लोग ही सारी व्यवस्था करेंगे और अपने गांव के युवाओं को पढ़ने के लिए एक बढ़िया पुस्तकालय बना कर देंगे जहां बच्चों को पढ़ने के लिए अनुकूल माहौल मिल सके। गांव में एक बार शिक्षा का माहौल बन गया तो गांव के बच्चे भी पढ़ लिख कर ऊंचे पदों पर पहुंच सकते हैं। गांव में फिर से आपसी भाईचारे और उन्नति का माहौल बन जाएगा। 

कहते हैं कि भारत गांव में बसता है तो फिर गांवों में भी शिक्षित लोगों का प्रतिशत बढ़ना चाहिए। गांव के लोग भी और ज़्यादा शिक्षित और उन्नत होने चाहिए। ग्राम पाठशाला मिशन के तहत दिल्ली एनसीआर में एक दर्जन के आस पास पुस्तकालय बन चुके हैं और लगभग एक दर्जन से भी ज़्यादा पुस्तकालयों का निर्माण कार्य चल रहा है।

पुस्तकालय का उद्घाटन कोई  राजनेता नहीं, अपितु गांव के ऐसे बेटे और बेटियां कर रहे हैं, जिन्होंने गत वर्ष बोर्ड की परीक्षा में गांव में अव्वल स्थान प्राप्त किया था। सबसे ज़्यादा उत्साहित करने वाली बात ये है कि गांव के इन पुस्तकालयों के उद्घाटन में अब आईएएस, आईपीएस व अन्य विभागों के अधिकारी पहुंच रहे हैं।बच्चे जो बनना चाहते हैं वो लोग खुद आकर बच्चों का उत्साहवर्धन कर रहे हैं।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पुस्तकालय बनाने कि एक लहर सी चल रही है और सुनहरे भविष्य का निर्माण हो रहा है। इसी मिशन के तहत ग्राम पाठशाला टीम के सदस्य प्रवीण बैंसला ने दिनांक 25 दिसंबर 2020 से एक साइकिल यात्रा शुरू की थी और यह यात्रा 1 जनवरी 2021 को पूरी हुई। इस यात्रा में प्रवीण बागपत, हापुड़, बुलंदशहर, गौतमबुद्ध नगर और गाज़ियाबाद जिले के तमाम गांवों में जाकर लोगों को शिक्षा व पुस्तकालय के महत्व को समझाया। और बड़े हर्ष की बात है उनकी ये मेहनत रंग ला रही है। तमाम गांवों के प्रधान व बड़े बुज़ुर्ग अपने-अपने गाँवों में पुस्तकालय बनाने के लिए राज़ी हो गए हैं। ग्राम पाठशाला टीम में अब सरकारी, प्राइवेट कॉरपोरेट, डॉक्टर, वकील, बिजनेसमैन, शिक्षक व अन्य विभागों में काम करने वाले लोग जुड़ रहे हैं। ग्राम पाठशाला का मिशन है देश के हर गाँव में एक लाइब्रेरी, यानी 6,64,369 लाइब्रेरी।


पुस्तकालय अभियान की इस टीम में लाल बहार (इंस्पेक्टर एनएचआरसी), जगबीर भाटी, अमर चौधरी (मोटिवेशनल स्पीकर) सोनू बैंसला (सब-इंस्पेक्टर, दिल्ली पुलिस), कुलदीप बैंसला (सब-इंस्पेक्टर, यूपी पुलिस), प्रवीण (एडवोकेट) असिस्टेंट प्रोफेसर अजय पाल नागर, जितेंद्र नागर, शदेवराज नागर, अमर बैंसला (दिल्ली पुलिस), देवेंद्र बैंसला (दिल्ली पुलिस) रविंद्र बैंसला (दिल्ली पुलिस) रामवीर तंवर, योग गुरु मनदीप अवाना,  कुमार सतीश, अमित भाटी (दिल्ली पुलिस),  नितिन नागर (दिल्ली पुलिस), संदीप नागर (दिल्ली पुलिस) तथा हाल ही में यू. पी.एस. सी. परीक्षा में चयनित हुए एसीपी फिरोज़ आलम है।

बुधवार, 27 जनवरी 2021

कविता - चोटिल खाकी



खाकी चोटिल हुई मगर
संयम न अपना छोड़ा
देश के काले अध्याय में
एक चिन्ह सुनहरा जोड़ा

वचन तोड़कर गुंडों ने
दिखा दी अपनी गद्दारी
चोला भेड़ का तज कर
निकले भेड़िए बारी-बारी
फिर सभी भेड़ियों ने मिलकर
मर्यादा की सीमा को तोड़ा
खाकी चोटिल हुई मगर
संयम न अपना छोड़ा...

जिस तिरंगे की खातिर
जाने कितने कुर्बान हुए
उसी तिरंगे ने देखो
जाहिलों से अपमान सहे
ऐसे गद्दारों से देश के
जन-जन ने मुख मोड़ा 
खाकी चोटिल हुई मगर
संयम न अपना छोड़ा...

चोटिल खाकी करे सवाल
उसका दोष बताया जाए
मानव की श्रेणी में वो है तो
उसे मानवाधिकार दिलाया जाए
आखिर कब तक खाएगी
खाकी अपमान का कोड़ा
खाकी चोटिल हुई मगर
संयम न अपना छोड़ा...
लेखक - सुमित प्रताप सिंह
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