मंगलवार, 30 जून 2020

सॉरी ज़िंदगी


ब भी मैं ज़िंदगी से 
बेहद उदास हो जाता हूँ
तब मेरे दिमाग में 
ये ख्याल आता है कि
क्यों न खत्म कर लूँ खुद को 
और चला जाऊं 
इस दुनिया से बहुत दूर
ये सोचते-सोचते मुझे
रास्ते में मिल जाता है
मंदिर पर भीख माँगने वाला 
दुर्घटना में अपनी दोनों टाँगें 
गँवा बैठा कलवा भिखारी
जो चंद रुपयों की भीख पा
समझता है खुद को
इस दुनिया का
सबसे खुशहाल आदमी
कुछ दूर और चलने पर 
मिल जाती है वो लड़की
जो एक सिरफिरे के 
एक तरफा प्यार में
तेजाब से जलवा चुकी है 
अपना खूबसूरत चेहरा
अपने सारे गमों को भुला 
जब वो हँसती है न तो
उसकी हँसी बहुत हसीन लगती है
और मुझे अपनी उदासी पर 
घिन सी आने लगती है
कुछ और आगे चलने पर 
मिलता है बचपन में
अपनी आँखें खो चुका श्यामू
जो मेरी आँखों का सहारा ले
इस दुनिया को देखकर
जी भरके खिलखिलाता है
अचानक जाने मुझे क्या होता है कि 
मैं भागकर अपने 
घर की ओर जाता हूँ
और अपनी माँ की गोद में 
अपना सिर रखकर सो जाता हूँ
माँ ममता भरे हाथों से
मेरे सिर को सहलाती है तो
एक बार फिर से 
जीने का मन करता है
और मैं पछता कर कहता हूँ 
मैंने तुम्हारा मोल न समझा
सॉरी ज़िंदगी।
लेखक - सुमित प्रताप सिंह

बुधवार, 27 मई 2020

कोरोना वारियर्स सर्टिफिकेट की चाहत


पत्नी - क्या बात है? आज बड़े खुश लग रहे हो?
पति - खुश होने वाली बात ही है। ये देखो। (अपने मोबाइल में कुछ दिखाता है)
पत्नी - अरे ये क्या है??
पति- ये सर्टिफिकेट है।
पत्नी- किस बात का सर्टिफिकेट?
पति- कोरोना वारियर्स का।
पत्नी- कोरोना वारियर्स का...पर तुमने कोरोना की कौन सी वार लड़ ली जो कोरोना वारियर्स का सर्टिफिकेट मिल गया।
पति- अरे यार सोशल मीडिया पर ये देख-देख कर थक गया था कि हर ऐरे-गैरे, नत्थूखैरे को कोरोना वारियर्स घोषित कर उसके नाम का सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाता है।
पत्नी - हाँ, काफी दिनों से ये ड्रामा देख तो मैं भी रही हूँ।
पति- इसी ड्रामे को देख कर मेरे दिल में भी एक टीस सी रहती थी कि कोई हमें भी एक अदद सर्टिफिकेट देकर कोरोना वारियर्स घोषित कर डाले।
पत्नी - तो तुमने इस सर्टिफिकेट का जुगाड़ कहाँ से किया?
पति- एक साथी हैं अपने श्रीमान जुगाड़ी लाल। वो पुलिस के साथी नाम से एक संस्था चलाते हैं। उन्हीं से इस सर्टिफिकेट का जुगाड़ हुआ है।
पत्नी- पुलिस के साथी? वैसे देखने में आ रहा है कि पुलिस इन दिनों काफी मेहनत कर रही है। जुगाड़ी लाल की संस्था पुलिस वालों का साथ निभा रही है कि नहीं?
पति- मैं कुछ समझा नहीं।
पत्नी- अरे, मैं ये पूछ रही हूँ कि जुगाड़ी लाल ने पुलिस के साथी नाम से संस्था बनायी है तो उस संस्था के माध्यम से पुलिस का कैसे साथ निभाती है। मतलब कि पुलिस के लिए कुछ करती-वरती भी है कि नहीं।
पति- करती है न। संस्था के अध्यक्ष जुगाड़ी लाल किसी न किसी पुलिस अफसर के साथ कभी गुलदस्ता तो कभी मिठाई का डिब्बा देते हुए चमकदार बत्तीसी दिखाकर फोटो खिंचवाते हैं और उसे सोशल मीडिया पर शेयर कर देते हैं।
पत्नी - और क्या-क्या करते हैं जुगाड़ी लाल और उनकी संस्था?
पति- जब किसी का पुलिस से संबंधित कोई काम अटकता है तो जुगाड़ी लाल जुगाड़ बिठा कर उस काम को करवा देते हैं। इससे उनकी रोजी-रोटी का अच्छा-खासा जुगाड़ भी हो जाता है।
पत्नी - तो कोरोना की इस घड़ी में जुगाड़ी लाल की संस्था कुछ कर-वर भी रही है कि नहीं?
पति- कर रही है न।
पत्नी - क्या कर रही है।
पति- इस समय जुगाड़ी लाल अपनी संस्था के माध्यम से सोशल डिस्टेंसिंस की पूरी इज्ज़त करते हुए कोरोना वारियर्स के ऑनलाइन सर्टिफिकेट बाँटते हुए अपने पापी पेट के जुगाड़ में मस्त हैं।
पत्नी- और इसी दौरान तुमने भी उनसे कोरोना वारियर्स के सर्टिफिकेट का जुगाड़ कर लिया। वैसे उन्होंने तुम्हें किस कैटगरी में कोरोना वारियर्स घोषित किया है?
पति- अब सर्टिफिकेट मिल गया है तो  कैटेगरी-वैटेगरी भी बाद में सोच ली जाएगी।
पत्नी - यार, मैं ये कह रही थी कि जुगाड़ी लाल से कह कर मेरा भी कोरोना वारियर्स का एक सर्टिफिकेट बनवा देते। मेरी जाने कितनी फ्रेंड्स कोरोना वारियर्स के सर्टिफिकेटों के संग सोशल मीडिया पर इठलाती फिर रही हैं।
पति- हम्म, एक जेब तो खाली हो गयी। दूसरी जेब से पूछता हूँ कि सर्टिफिकेट के लायक उसमें कुछ वजन है भी कि नहीं?
पत्नी - (गुस्सा होते हुए) मतलब कि तुम मेरी छोटी सी बात भी नहीं मानोगे?
पति- अरे नहीं मेमसाब, तुम्हारी बात  सर आँखों पर...(फोन मिलाकर) हेलो जुगाड़ी लाल जी एक और कोरोना वारियर्स के सर्टिफिकेट का जुगाड़ कर देंगे? वो चिंता मत कीजिए आपकी सेवा का जुगाड़ हो जाएगा।
जुगाड़ी लाल - (दूसरी ओर से फोन पर) जनाब, अब मैं कोरोना वारियर्स के सर्टिफिकेट नहीं दे पाऊँगा।
पति - जुगाड़ी लाल जी, मैं खर्चा देने को तैयार हूँ, फिर आपको दिक्कत क्या है?
जुगाड़ी लाल - जनाब, मैंने इतने ऑनलाइन सर्टिफिकेट बाँटे कि किसी ने पुलिस के कान फूँक दिए और मुझे  हवालात में दिए जाने की तैयारी चल रही है। 
पति - अरे बाप रे! ( वह घबरा कर मोबाइल फोन से कोरोना वारियर्स सर्टिफिकेट को फटाफट डिलीट कर देता है)
पत्नी - अरे ये क्या किया तुमने? मेरे सर्टिफिकेट का जुगाड़ किया नहीं और अपना सर्टिफिकेट भी डिलीट कर दिया।
पति - (प्यार से कंधे पर हाथ रखते हुए) डार्लिंग, ये सर्टिफिकेट वगेरह सब मिथ्या हैं। इंसान जिस हाल में हो उसी में जिये तो ज्यादा अच्छा है।
पत्नी - हुँह, आ गए न अपनी औकात पे।
पति - मेमसाब, अब तुम जो भी समझो वही ठीक है!
लेखक - सुमित प्रताप सिंह

नोट - दोस्तो, कोरोना वारियर्स के फर्जी सर्टिफिकेट बाँटने वाले जुगाड़ी लालों से खुद भी सावधान रहें और अपने दोस्तों व परिचितों को भी सावधान रहने को कहें।

शुक्रवार, 1 मई 2020

हास्य कविता - टहलू इंसान



र कोई इंसान भला 
घर में कहाँ बहलता है
इसलिए विवश हो वह
घर से बाहर जा टहलता है
घर में वह रुक जाए 
ये भी भला कोई बात है
उसकी तो एक अलग ही 
टहलू नाम की जमात है
बेशक कैसी भी रोक हो
कोई भी सरकारी टोक हो
वह इंसान हर रोक-टोक को
बड़ी बेदर्दी से नकार देगा
जब तक आप उसे टोकेंगे
वह पार्क का एक चक्कर काट लेगा
जब अकेले टहलने से  
वह बहुत ऊब जाएगा
तब टहलू जमात के साथ
वह गप्प में डूब जाएगा
जब रंगे हाथों वह पकड़ा जाएगा
तो झट से ढेरों बहाने बनाएगा
मैं तो आया था माँ की दवाई लेने
या फिर बच्चे की जिद पर मिठाई लेने
पत्नी के आदेश से रौशनाई लेने 
या फिर ओढ़ने को नई रजाई लेने 
उसका कोई न कोई बहाना
आखिर काम कर ही जाएगा 
और पकड़े जाने से वह
बाल-बाल बच जाएगा
यूँ बच जाने पर वह 
खुशी के मारे ऊल जाएगा
और कुछ देर बाद टहलने को 
फिर किसी पार्क में कूद जाएगा।
लेखक - सुमित प्रताप सिंह



बुधवार, 29 अप्रैल 2020

गीत : गाथा कोरोना वारियर्स पत्रकारों की


एक-एक पल की खबर दिखाते 
घर, कूँचों और गलियारों की
आओ हम सब मिल गाथा गायें
कोरोना वारियर्स पत्रकारों की
कोई खबर न छूटे जिनसे
हो मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारों की
आओ हम सब मिल गाथा गायें
कोरोना वारियर्स पत्रकारों की

सर्दी, गर्मी, बारिश की 
ये परवाह कभी न करते हैं
देश के हर हालात पे
ये ध्यान सदा ही धरते हैं
 ये देश का चौथा खंबा कहलाते
हम कद्र करें इन उजियारों की 
आओ हम सब मिल गाथा गायें
कोरोना वारियर्स पत्रकारों की

देश में झगड़े-दंगे हों 
या फैले कोई महामारी
पत्रकार कर्तव्य निभा 
जुटा लाते खबरें सारी
अंदाज अलग, है बात अलग
देश के इन बलिहारों की
आओ हम सब मिल गाथा गायें
कोरोना वारियर्स पत्रकारों की

ये बिना सुरक्षा जीते हैं
पर चिंता राष्ट्र की करते हैं
इनमें से जाने कितने अक्सर
बदहाली-तंगहाली में मरते हैं 
फिर भी इनकी कोशिश रहती
देश से, हो छटा दूर अंधियारों की 
आओ हम सब मिल गाथा गायें
कोरोना वारियर्स पत्रकारों की

लेखक : सुमित प्रताप सिंह

शुक्रवार, 27 मार्च 2020

हास्य व्यंग्य : मंचीय कवि का कोरोना काल


   चीनी वायरस कोरोना के कारण देश में हुए लॉकडाउन के बाद मंच के धुरंधर कवि चोरोना लाल पर बहुत बड़ी आफत आ गयी। पूरे साल मंच पर व्यस्त रहने वाले चोरोना लाल अचानक कुछ भी करो न की स्थिति में आ गए थे। अब उनकी दौड़ इस कमरे से उस कमरे या कमरे से बाथरूम, लैट्रिन या बालकनी तक ही होती थी। एक दिन उन्होंने अपनी दौड़ का रास्ता बदल दिया और कमरे से रसोई की ओर चले गए। वहाँ उनकी पत्नी ने अपनी थकान का हवाला देकर उनसे पूरे दिन के बर्तन धुलवा लिए और चुपके से इस दुर्घटना का वीडियो भी बना लिया। अगले दिन से पत्नी ने उस वीडियो को टिकटोक पर डालने की धमकी देकर उन्हें अपनी दौड़ कमरे से रसोई के बीच लगाने को विवश कर दिया। बीच में एक-आध बार उनकी दौड़ कमरे से बाथरूम के बीच हुई तो बेचारे पत्नी के धमकी भरे आदेश के कारण कपड़ों पर भी जोर आजमाइश कर आए। उन्होंने अचानक आयीं इन विपत्तियों का सदुपयोग करने का विचार किया और मंच के  लिए कुछ दर्द भरी रचनाओं का निर्माण करने की योजना बनाने लगे। पर उनकी ये योजना सफल नहीं हो पायी और उनसे किसी भी रचना का निर्माण लाख प्रयास करने के बाद भी न हो पाया।
उन्होंने सोचा कि दर्द भरी रचना ना सही कुछ प्रेम भरे गीत ही बनाए जाएं। इसके लिए वो घर से चुपचाप निकल कर अपनी सोसाइटी के बगल में बने लंबे-चौड़े गार्डन में पहुँचे और अपने बटुए में छिपायी हुई मंच की युवा कवियत्री छप्पन छुरी की तस्वीर निकाली और उसमें डूबते हुए स्वप्न संसार में प्रेमगीत की खोज में भटकने लगे। तभी उनकी पीठ पर पड़े जोरदार लट्ठ ने उन्हें उस स्वप्न संसार से वास्तविक दुनिया में वापस ला पटका। चोरोना लाल ने चोर नज़रों से देखा तो इलाके के थानेदार लठैत सिंह को अपने स्टाफ के संग गुस्से में खड़ा पाया। इससे पहले कि उन पर लठैत सिंह के लट्ठ का दूसरा वार होता, उन्होंने बिना देर किए लठैत सिंह के पैर पकड़ लिए। चोरोना लाल ने आयोजकों और संयोजकों के पैर पकड़ने का सालोंसाल जो अभ्यास किया था वो उस दिन काम आया और लठैत सिंह उनको बिना लट्ठ जड़े घर में पड़े रहने की कड़ी चेतावनी देकर वहाँ से चले गये।
अगला दिन भी चोरोना लाल का रचना निर्माण के संघर्ष करते हुए कमरे से क्रमशः दूसरे कमरे, रसोई, बाथरूम, लैट्रिन और बालकनी की दौड़ लगाते हुए ही बीता। रात को बड़ी उदासी के साथ चोरोना लाल अपने मस्तिष्क से रचना का निर्माण करो ना का निवेदन करते हुए बिस्तर पर ढेर हो गए।
अगले दिन चोरोना लाल के घरवालों ने देखा कि वो बिस्तर पर पड़े-पड़े अधमरे हो कुछ बड़बड़ा रहे थे। घरवालों ने ध्यान से सुना तो चोरोना लाल बड़बड़ाते हुए 'प्राण दें' 'ऊर्जा दें' 'आशीर्वाद दें' इत्यादि वाक्यों को बार-बार दोहरा रहे थे।
घरवालों ने नीम-हकीम, डॉक्टर, झाड़-फूँक जैसे सारे उपाय कर डाले पर चोरोना लाल की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। अचानक उनकी पत्नी को न जाने क्या सूझी और उन्होंने चोरोना लाल के गुरु श्री जुगाड़ करोना को फोन मिला दिया। चोरोना लाल की पत्नी की पूरी बात को सुनकर गुरुजी मंद-मंद मुस्कुराये और उन्होंने चोरोना लाल की पत्नी को इस परेशानी से बाहर निकलने का उपाय सुझाया।
अगले दिन निश्चित समय पर घर में रखे पुराने तख्त को सजाकर मंच का निर्माण किया और उस पर चोरोना लाल को स्थापित किया गया। घर के बाकी सदस्य श्रोता बनकर नीचे दरी बिछाकर बैठ गए। इसके पश्चात गुरु श्री जुगाड़ करोना व उनकी कवि मंडली के होनहार जुगाड़ू कवियों को वीडियो कॉलिंग के माध्यम से जोड़ा गया और ऑनलाइन कवि सम्मेलन का शुभारंभ किया गया। चोरोना लाल ने बारी-बारी से सभी कवियों की रचनाओं को ध्यान से सुना और अपने गुरु श्री जुगाड़ करोना को प्रणाम कर चौर्यकर्म का सदुपयोग करते हुए झट से एक लंबी रचना का निर्माण कर डाला। अब घर के सदस्य चोरोना लाल की हर पंक्ति सुनने के बाद 'प्राण दें' 'ऊर्जा दें' और 'आशीर्वाद दें' इत्यादि वाक्य सुनते ही ताली पीटना आरंभ कर देते। उस ऑनलाइन कवि सम्मेलन के समाप्त होने पर चोरोना लाल की पत्नी ने लिफाफे में 1100 ₹ रुपये रखकर उन्हें दिए। चोरोना लाल ने आदतानुसार उस लिफाफे में से संयोजक का कमीशन निकालकर पत्नी को वापिस कर दिया। शाम तक  चोरोना लाल की तबीयत में अप्रत्याशित सुधार आया और उनकी एक कमरे से दूसरे कमरे, रसोई, बाथरूम, लैट्रिन और बालकनी की दौड़ फिर से शुरू हो गयी।
लेखक : सुमित प्रताप सिंह

कार्टून गूगल से साभार

रविवार, 15 मार्च 2020

व्यंग्य : हम सब कोरोना से कम हैं क्या



       न दिनों कोरोना का कहर पूरे संसार पर हावी हो रखा है। अब तो इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा भी महामारी घोषित कर दिया गया है। भोले-भाले देश चीन पर इसे फैलाने का दोष मढ़ा जा रहा है। हालाँकि चीन ने अपने से भी भोले-भाले देश अमरीका पर इसे फैलाने का इल्जाम जड़ दिया है। कोरोना आरोप-प्रत्यारोप के खेल से निश्चिंत हो अपने पुण्य कार्य में व्यस्त है।
ताज़ा समाचार ये है कि कोरोना वायरस  ने भारत में भी दस्तक दे दी है। हालाँकि कोरोना वायरस को इस बात का भान नहीं है, कि उससे भी बड़ा वायरस अपने देश में जाने कबसे मौजूद है। ये वायरस समय-समय पर अपने संक्रमण द्वारा देश में अपना-अपना योगदान देता रहता है। अब यदि हम चाहें तो कोरोना की भाँति इस वायरस का भी नामकरण कर सकते हैं. वैसे इसका नाम 'सड़ोना' रखना उचित रहेगा। इस वायरस की उत्पत्ति तब होती है जब किसी व्यक्ति की मानसिकता सड़ना आरंभ कर देती है।
इस सड़न प्रक्रिया के फलस्वरूप उस व्यक्ति के मस्तिष्क में सड़े-गले विचारों की उत्पत्ति होनी आरंभ हो जाती है। तदुपरांत वह व्यक्ति अपनी जाति, अपने समुदाय अथवा अपने धर्म के सर्वश्रेष्ठ होने की घोषणा करते हुए दूसरे व्यक्ति की जाति, समुदाय व धर्म को दीन-हीन मानते हुए उसका व उसके महापुरुषों का मान-मर्दन करना आरंभ कर देते हैं।
जब दूसरा व्यक्ति सहनशीलता को गुडबाय बोलकर इस बात का विरोध करना आरंभ कर देता है, तो सड़ोना वायरस से पीड़ित व्यक्ति आगबबूला हो उठता है और गुस्से में वह चाकू निकालता है, पेट्रोल बम तैयार करता है, पत्थर इकट्ठे करता है और विरोध करने वाले व्यक्ति पर धावा बोल देता है। सड़ोना वायरस अवसर पाते ही दूसरे व्यक्ति को भी संक्रमित कर डालता है। इसके पश्चात ऐसा विध्वंस होना आरंभ होता है कि उसे देखकर मानवता शर्मसार होते हुए हाथ जोड़कर सड़ोना वायरस से पीड़ित व्यक्तियों से निवेदन करती है कि अब बस भी करो ना। पर मानवता की नहीं सुनी जाती। कोरोना वायरस ये देखकर एक पल के लिए तो घबरा जाता है। कोरोना की इस हालत को देखकर सड़ोना वायरस से पीड़ित व्यक्ति खिलखिलाकर हँसते हुए कहते हैं कि हम सब कोरोना से कम हैं क्या।

लेखक : सुमित प्रताप सिंह

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...