सोमवार, 16 जुलाई 2018

कविता - कविता का स्वामित्व

 
ये कविता है मेरी भगवान कसम
पर तू कहता है तेरी भगवान कसम
तो सुन ये कविता है केवल उसकी
जिसके ज्यादा चेरा-चेरी भगवान कसम 
ये कविता है मेरी...

तूने कच्चा माल बनाया
मैंने उसे मस्तिष्क में पकाया
और गढ़ा अपने तरीके से
फिर उसको मंच-मंच घुमाया
कविता के मंच पे चलती है
इतनी तो हेराफेरी भगवान कसम 
ये कविता है मेरी...

कविताबाजी ही अपना धंधा है
माना इसमें होता थोड़ा पंगा है
तुझको अपना कह सुना दिया
भला इसमें क्या गोरखधंधा है
बस इतने में ही स्वर्ग सिधारी
दादी-नानी तेरी भगवान कसम 
ये कविता है मेरी...

चल गलती हुई तो फौरी सुन
मेरी भीमकाय सी सॉरी सुन
फिर भी नहीं मानता तो जा
जाके माँ शारदे की लोरी सुन 
कविता के मंच पे चलने की 
नहीं औकात तेरी भगवान कसम 
ये कविता है मेरी...

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