शुक्रवार, 26 अगस्त 2016

एक पत्र शहीद सिपाही आनंद सिंह के नाम



प्यारे भाई आनंद सिंह 
सादर दिवंगतस्ते!
बहुत ही दुखी और उदास मन से तुम्हें यह पत्र लिख रहा हूँ कलम चलते-चलते अचानक रुक सी जाती है, लेकिन तुम जैसे बहादुर पुलिस के सिपाही को पत्र लिखने में ये कलम भी गौरव का अनुभव करते हुए रुक-रूककर एकदम से चल पड़ती है कुछ रोज पहले तुम अद्भुत शौर्य दिखाते हुए एक गरीब रेहड़ीवाली महिला को लुटने से बचाते हुए उन तीन बदमाशों से जाकर भिड़ गए और बदमाश की गोली खाकर भी तुमने तब तक उनका पीछा किया जब तक कि तुम निढाल होकर धरती पर गिर नहीं पड़े आसपास मौजूद कथित बहादुर जनता ने ये सब देखा, लेकिन उसकी कथित बहादुरी ने उसे उन बदमाशों को रोकने को प्रेरित नहीं किया, फलस्वरूप तुम्हें इस संसार को छोड़कर विदा होना पड़ा वैसे तुम तो इस बात को भली-भांति जानते और समझते थे कि देश का दिल कहे जानेवाले इस महानगर दिल्ली का माहौल कितना ख़राब हो रखा है और यहाँ लोगों के दिलों में दिल जैसी कोई चीज अब सलामत ही नहीं रही है ये तुम कैसे भूल गए कि यह महानगर अराजकता के शिकंजे में किस कदर जकड चुका है क्या तुम बीते दिनों की उन घटनाओं को भूल गए थे कि कैसे सरेआम जनता के वेश में छिपे अपराधियों द्वारा पुलिसकर्मियों को समय-समय पर सरेआम पीटा गया, जरा-जरा सी बात पर पुलिस थानों और चौकियों को घेरकर नारेबाजी और पत्थरबाजी करते हुए उन्हें जलाने तक कोशिश की गई और जाने कितने पुलिसकर्मियों को बिना गलती और बिना सुनवाई के जेल में ठूँस दिया गया कम से कम तुम्हें इतनी सावधानी तो बरतनी ही चाहिए थी कि अपने साथ सुरक्षा के लिए सरकारी पिस्तौल ही रखते पर फिर एक बार को ख्याल आता है कि सरकारी पिस्तौल को रखने का फायदा भी क्या होता? अगर तुम्हारी सरकारी पिस्तौल से कोई बदमाश मारा भी जाता तो जाने कितने संगठन तुम्हारे खिलाफ मोर्चा लेने को खड़े हो जाते तथा मानवाधिकार की दुहाई देते हुए तुम्हारे पुतले फूँक रहे होते और तुम्हें बिना समय गँवाए जेल में डाल दिया जाता समाचार चैनलों पर कथित बुद्धिजीवी तुम्हारे हाथों मारे गए अपराधी को संत घोषित करते हुए तुम्हें रावण या कंस का अवतार सिद्ध कर रहे होते और कलियुग के राजा हरीश चंद्र मारे गए अपराधी को शौर्य पदक देने की सिफारिश करते हुए उसके परिवार को गोद लेने की तैयारी में अब तक लग चुके होते पर चूँकि ऐसा कुछ हुआ नहीं और किसी लुच्चे-बदमाश की बजाय एक पुलिस का जवान मारा गया इसलिए अख़बारों ने भी इस खबर को पहले पन्ने पर स्थान देने में भी शर्म महसूस की मानवाधिकार प्रेमी शांत हैं और किसी दानव के मारे जाने पर सक्रिय होने के लिए वचनबद्ध हैं तथा कथित बुद्धिजीवी अपनी बुद्धि को धार लगते हुए उचित अवसर की ताक में हैं कम से कम इस बात की संतुष्टि है कि तुम्हें शहीद का दर्जा है दिया गया है और तुम्हारे परिवार को नौकरी और एक करोड़ रुपए देने की घोषणा कर दी गई हैहालाँकि इन सबसे शायद ही तुम्हारी भरपाई हो सके अंत में हम सभी पुलिस के भाई-बंधु तुम्हारे परिवार संग तुम्हारी आत्मा की शांति के लिए इस उम्मीद के साथ प्रार्थना करते हैं कि हृदयविहीन इस महानगर के हालात सुधरें और फिर कोई आनंद कुमार यूँ बेमौत न मारा जाए

तुम्हें अंतिम विदाई देते हुए वीरतामय नमस्कार

तुम्हें अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि देता हुआ

तुम्हारा एक विभागीय भाई     

लेखक : सुमित प्रताप सिंह 

शुक्रवार, 5 अगस्त 2016

व्यंग्य : वायरल होने की चाहत


 इन दिनों वायरल होने का ज़माना है कोई सी चीज कब और कैसे वायरल होकर चर्चित हो जाए कि पता ही नहीं चलता कुछ खुशकिस्मत लोग होते हैं जो स्वयं ही वायरल होकर दुनिया में छा जाते हैं, वहीं कुछ लोग अपने तिकड़मी दिमाग का इस्तेमाल कर खुद को वायरल कर डालते हैं ये वायरलपना नए युग के मीडिया अर्थात सोशल मीडिया की विशेष उपलब्धि है वायरल नामक हथियार या तो किसी को रातों-रात चर्चित करके उसकी किस्मत खोल देता है या फिर उसका डिब्बा गोल कर डालता है पर वो कहते हैं न कि बदनाम हुए तो क्या नाम न हुआ? इसलिए कभी-कभी इच्छा होती है कि काश! हम या हमारी कोई रचना भी वायरल हो जाए पर सोचने से भला क्या होता है जब राम चाहेंगे तभी तो कुछ होगा, मतलब कि कुछ वायरल होगा

पिछले दिनों कई खबरें वायरल हुईं जैसे हिरन जैसे तुच्छ जीव की हत्या के झूठे केस में फँसे अपने हुड़हुड़ दबंग भाई कोर्ट से बाइज्जत बरी हो गए इससे जहाँ भारतीय न्यायप्रणाली की निष्पक्षता का खुलासा हुआ वहीं दबंग अभिनेता के भीतर छिपे ह्यूमन से सबका साक्षात्कार हुआ इस खबर के वायरल होते ही दबंग अभिनेता के दबंग प्रशंसकों की बद्दुआओं से बचने के लिए हिरन की आत्मा ने आसमान से अपनी भूल के लिए माफ़ी माँगी और खुद ही गोली से आत्महत्या करने की बात कबूल ली

यू.पी. में अगले साल चुनावी महायुद्ध छिड़नेवाला है लेकिन अभी से उसके पूर्वाभ्यास की ख़बरें वायरल होने लगीं हैं और उनके साथ कलियुगी संस्कृति को समृद्ध करनेवाले वचन और गालियां भी अभी हाल ही में खुद को राजा हरीश चंद्र की संतान माननेवाले एक प्रदेश के मुख्यमंत्री ने खुद की हत्या होने की खबर वायरल कर डाली अब जाने इसके पीछे उनकी कौन सी जेड प्लसीय योजना रही होगी? इसके साथ-साथ एक पहलवान को डोप नामक दाँव से ओलंपिक से पहले ही देशी पटकनी देने की बात भी वायरल हो चुकी है

यह सब देख हम जैसे लाख टके के लेखक अक्सर सोचते हैं कि हमारी कोई रचना कभी वायरल होकर हमें प्रसिद्धि नामक सिद्धि से मिलवाएगी भी कि नहीं? लेकिन हम जैसे लोग ऊपरवाले से वायरल होने की कामना भी करें तो वायरल फीवर मिल जाता है वायरल होने की चाहत की हद तो देखिए वायरल फीवर से ग्रस्त होते हुए भी मन में ये उधेड़बुन मची हुई है कि अपना ये व्यंग्य पाठकों के बीच वायरल हो पाएगा कि नहीं?   


लेखक : सुमित प्रताप सिंह


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