शनिवार, 11 अप्रैल 2015

यमराज का न्याय (लघु कथा)



   मराज का दरबार लगा हुआ था। चित्रगुप्त प्रत्येक जीव के कर्मों का बही खाता जाँचकर यमराज को उसका पूरा विवरण देते थे और यमराज उस जीव को उसके लिए तय स्थान पर भेजने का निर्णय सुना देते थे। तभी एक जीव को पकड़कर यमदूतों ने यमराज के सामने प्रस्तुत किया।
यमराज - इस जीव ने क्या धृष्टता की है?
यमदूत - महाराज यह जीव बहुत जल्दी में लगता है। बार-बार पंक्ति बदल कर दूसरी पंक्ति में अन्य जीवों के आगे खड़ा हो जाता है।
यमराज - चित्रगुप्त देखो तो इस जीव की मृत्यु किस प्रकार हुई थी?
चित्रगुप्त - महाराज इसे अपनी पंक्ति में न रहने की बहुत पुरानी बीमारी है। यह सड़कों पर भी अपनी पंक्ति में नहीं चलता था और बार-बार अपनी पंक्ति बदलता रहता था। एक दिन इसी आदत के कारण यह एक ट्रक के नीचे आकर अकाल मृत्यु का शिकार हो गया।
यमराज - क्या इसको ट्रैफिक पुलिस के संदेश "लेन ड्राइविंग, सेफ ड्राइविंग" के विषय में ज्ञान नहीं था?
चित्रगुप्त - महाराज इसे यातायात के सभी नियमों का भली-भाँति ज्ञान था, किन्तु इसमें जल्दबाजी की सनक रहती थी।
यमराज - ठीक है तो इस दुष्ट को पृथ्वी पर फिर से भेजो। वहाँ यह ट्रैफिक पुलिस का सिपाही बनकर सड़कों पर यातायात को सुचारू रूप से चलवाने में योगदान देगा। जब यह तेज धूप में तपकर कोयले की तरह काला होते हुए व वाहनों का धुआँ पी-पीकर अपना कलेजा खोखला करते हुए यातायात में अवरोध उत्पन्न कर आतंक मचानेवाले इस जैसे आतंकियों से निपटेगा तब इसे अनुभव होगा कि इस जैसे दुष्टों के कारण पृथ्वी लोक पर मानव जाति को कितनी विपत्तियाँ और कठिनाइयाँ झेलनी पड़ती हैं।
चित्रगुप्त - जैसी आपकी आज्ञा महाराज।

कार्टून गूगल से साभार 

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