सोमवार, 29 जून 2015

लघु कथा : तमाशबीन



   पुलिस जिप्सी ने जैसे ही सड़क पर यू टर्न लिया, गलत दिशा से आ रही एक मोटरसाइकिल उससे टकरा गयी और उसपर सवार आदमी उछलकर कुछ दूर जा गिरा। पुलिस जिप्सी का ड्राइवर सूबे और उसका साथी हवलदार फत्ते झट से जिप्सी से नीचे उतरे और उस आदमी को सड़क से उठाकर उसे सड़क के एक किनारे बिठाकर उसे फर्स्ट ऐड देकर उसके सामान्य होने की प्रतीक्षा करने लगे। तभी सूबे ने देखा कि एक व्यक्ति अपने मोबाइल से उनकी रिकॉर्डिंग कर रहा है। यह देख सूबे को बीते दिनों मोबाइल से फ़िल्म बनाने और उसे तोड़-मरोड़कर अपने हिसाब से पुलिसवालों के खिलाफ इस्तेमाल करने की घटनाएँ ताज़ा हो गयीं। अपनी नौकरी खतरे में देख सूबे उस व्यक्ति से मोबाइल छीनने को उसपर झपटा, लेकिन वह व्यक्ति पलक झपकते ही वहाँ से उड़न छू हो गया। तभी वहाँ से गुज़र रहे एक पहलवान ने सूबे को टोककर उससे पूछा, "उस आदमी के पीछे क्यों भाग रहे थे? कौन था वो और उसने तुम्हारा क्या बिगाड़ दिया जो उसे पकड़ने की इतनी जरुरत पड़ गयी?"

तभी मोटरसाइकिल सवार कराहते हुए उठा और पहलवान से बोला, "भाई साहब वह तमाशबीन था और ये तमाशबीन किसी की मदद करने के बजाय अपने मोबाइल से फ़िल्म बनाकर और उसे सब जगह भेजकर किसी न किसी बेचारे का दुनियाभर में तमाशा बनाते हैं। गलती मेरी थी जो मैं गलत साइड से जल्दबाजी में मोटरसाइकिल चलाकर जा रहा था। शुक्र है कि मेरे साथ कोई अनहोनी नहीं हुयी और भला हो इन पुलिसवाले भाइयों का जो इन्होंने समय पर सहायता देकर मुझे बचा लिया।"

तभी पहलवान ने अपनी कनखियों से अपने अगल-बगल में देखा तो पाया कि वहाँ मौजूद बाकी तमाशबीन भी वहाँ से खिसक चुके थे।


बुधवार, 24 जून 2015

फिल्म समीक्षा : ए बी सी डी 2

    फिल्म की शुरुआत होती है सुरेश (वरुण धवन) और उसकी डांस टीम का एक डांस प्रतियोगिता के फाइनल में पहुँचने और सुरेश और उसकी टीम से किसी न किसी तरह जुड़े लोगों द्वारा इस कामयाबी में अपनी भागीदारी दिखलाते  हुए चैनल पर अपना वक्तव्य देते हुए। सुरेश और उसकी टीम द्वारा प्रतियोगिता में शानदार परफॉरमेंस देने के बावजूद हार जाते हैं। कारण होता है उनके द्वारा विश्व के एक चर्चित डांस ग्रुप के डांस स्टेप्स की नक़ल करना। इसके बाद सुरेश और उसकी टीम को जगह-जगह अपमान का सामना करना पड़ता है। धीमे-धीमे सुरेश का डांस ग्रुप टूट जाता है और उसके साथ कुछ गिने-चुने साथी ही बचते हैं। एक दिन सुरेश योजना बनाता है कि वो सभी विश्व स्तर पर होनेवाली  हिप हॉप डांस प्रतियोगिता में जाकर अपनी प्रतिभा दिखाकर अपने ऊपर नकलची होने के कलंक को धोयेंगे। इस काम में वो विशु (प्रभुदेवा) की मदद लेते हैं और बंगलौर में होनेवाली डांस प्रतियोगिता जीतकर हिप हॉप डांस प्रतियोगिता के लिए भारतीय प्रतिनिधि बनने का गौरव प्राप्त करते हैं। सुरेश के बॉस द्वारा दगा देने के बाद विशु के दिमाग के कारण वो हिप हॉप प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए भारत से लॉस वेगास की रवाना होते हैं। सुरेश और उसकी टीम विशु सर की आभारी होती है कि उनकी कृपा से वे सभी इस प्रतियोगिता में भाग लेने लॉस वेगास आ पाए, लेकिन हकीकत कुछ और होती है। असल में विशु ने लॉस वेगास तक पहुँचने के लिए सुरेश और उसकी टीम को सीढ़ी के रूप में इस्तेमाल किया था। यही इस कहानी का सस्पेंस है पर सस्पेंस भी ऐसा कि  'खोदा पहाड़ निकला चूहा' कहावत याद आती है ।
फिल्म की कहानी साधारण सी है। वरुण धवन और श्रद्धा कपूर का अभिनय ठीक-ठाक रहा है। जहाँ इस फिल्म में वरुण धवन डांस से अधिक अपनी मसल्स दिखाने को अधिक उत्सुक रहे वहीँ  श्रद्धा कपूर ने भी अंग प्रदर्शन करके वरुण को टक्कर देने का प्रयास किया है। प्रभुदेवा का डांस करने में कोई सानी नहीं लेकिन डायलॉग डिलीवरी में वो कमज़ोर लगे। फिर भी फिल्म के कुछ दृश्यों में उन्होंने हंसाया और भावुक किया यह भी बड़ी बात है। कहानी की रफ़्तार में कहीं-कहीं बहुत धीमापन आ जाता है। फिल्म में डांसर गजब का डांस करते दीखते हैं। डांस के हैरतगंज कारनामों से भरपूर दृश्य देखने योग्य हैं। ये दृश्य कुछ-कुछ वैसे ही हैं जैसे कि किसी मारधाड़ से भरपूर फिल्म में हीरो उड़-उड़कर अनेक बदमाशों को मार-मारकर ढेर कर डालता है। डांस प्रेमियों को यह फिल्म बेशक भाएगी, लेकिन डांस प्रेमियों को नेक सलाह है कि फिल्म के नाम 'एनीबॉडी कैन डांस' के अनुरूप वो इसमें उड़ने और उछलकूद करनेवाले दृश्यों की नक़ल न करें वर्ना उनका हाल श्रृद्धा कपूर से भी शायद बुरा हो। फिल्म में तो श्रृद्धा कपूर को रिप्लेस करने के लिए एक और हेरोइन मौजूद थी पर हर किसी की किस्मत में रिप्लेस की सुविधा नहीं होती। वैसे रेमो डिसूजा @ रमेश गोपी नायर द्वारा निर्देशित यह फिल्म डांस के शौकीनों को निराश नहीं करेगी।


शनिवार, 20 जून 2015

व्यंग्य : भोगम् शरणम् गच्छामि


   तने दिनों से हल्ला मचा रखा है जाने योग न हुआ कि क्या हो गया और ये समाचार चैनल इन्हें तो कोई न कोई मुद्दा चाहिए अपने चैनल की टी.आर.पी. बढाने के लिए हमारी भी किस्मत ऐसी जो ऐसा प्रधानमंत्री मिल गया जो योग से प्रेम तो करता ही है साथ ही साथ उसे सारे जग में फैलाने के लिए भी कमर कस डालता है कम से कम इसे हम बेचारों का ख्याल तो रखना चाहिए था, जिनकी इसने पिछले साल ही लुटिया डुबो डाली और हमें निठल्ला और बेकार बना डाला हम बेचारों को साल भर हो गया मक्खियाँ मारते-मारते एक तो हम बेचारे पहले से ही दुखी इतने हैं ऊपर से ये योग नामक शिगूफा छोड़ डाला अब हम बेचारों को अपने-अपने घरों में मक्खियाँ मारना छोड़कर किसी न किसी समाचार चैनल के दफ्तर में जाकर मच्छर मारने पड़ेंगे और अपने ऊल-जलूल तर्कों की पोटली खोलकर अपनी जबान हिलानी पड़ेगी हमारा ये प्रधानमंत्री भी न जाने कहाँ-कहाँ से नई-नई योजनायें ढूँढकर लाता है कभी स्वच्छता अभियान चलाते हुए झाड़ू लगाने लगता है तो कभी आतंकवादियों को दामाद की श्रेणी से तड़ीपार करके उनका राम नाम सत्य करवा देता है सोचिए तो सही एक वो भी दिन थे जब हर घर के बाहर कूड़ा आराम फरमाता हुआ मिल जाता था और अपने इलाके की सुन्दरता में चार चाँद लगा देता था अब इस साफ़-सफाई के चक्कर में ये ससुरा कूड़ा भी जाने कहाँ लापता गया इतने सालों से कूड़े की सुन्दरता और उसकी वो प्यारी सी बदबू की आदत पड़ गयी थी पर अच्छे दिन हमेशा थोड़े ही रहते हैं चाहे बेशक ये प्रधानमंत्री अच्छे दिनों का ढोल पीटता फिरे कहीं ऐसा हुआ कि सभी लोग स्वच्छता प्रेमी हो गए तो जाने हम जैसे प्राणी जी पायेंगे भी कि नहीं और वो दिन भी कौन भूला है जब हमारे सैनिक के सिर की फ़ुटबाल बनाकर पड़ोसी देश के सैनिक अपनी फिटनेस बनाने का काम करते थे और अब ये दिन देखने पड़ रहे हैं जब हमारा प्रधानमंत्री उनकी फ़ुटबाल बनाने की तैयारी कर रहा है अब हमारा प्रधानमंत्री योग के माध्यम से हमारे मन का कूड़ा-करकट साफ़ करके हमें स्वस्थ करने की साजिश रच रहा है अब ये कौन होता है ये तय करनेवाला कि किसे योग करना चाहिए और किसे नहीं  भला क्या रखा है इस योग-वोग मेंदेशवासी अगर योग करने लगे तो उनका तन-मन स्वास्थ्य की ओर अग्रसर नहीं हो जाएगा। और जब देशवासियों के तन-मन स्वस्थ हो जायेंगे तो वे अपना अच्छा-बुरा जानने लग जायेंगे फिर राजनीतिक रूप से बेरोजगार हुए हम बेचारों का क्या होगा क्या हमारा प्रधानमंत्री चाहता है कि हम बेचारे मरते दम तक मक्खियाँ ही मारते रहें अच्छा ये योग का कार्यक्रम अपने देश तक ही सीमित रहता तब तो ठीक भी था पर हमारा प्रधानमंत्री तो इसे पूरे विश्व में फैलाने की योजना बना रहा हैमतलब कि पूरे विश्व के लोगों के तन और मन का कूड़ा-कबाड़ा योग के माध्यम समाप्त करने का षड्यंत्र रचा गया है यदि ये षड्यंत्र सफल हो गया और योग ने उनके मन-मस्तिष्क पर कुप्रभाव डालकर उसे स्वच्छ और स्वस्थ कर दिया तो विश्व में आपसी भाईचारा और सद्भाव नामक वायरस तेजी से फ़ैल सकते हैं फिर राजनीति की रोटियाँ सेकने हेतु चूल्हे कैसे चल पायेंगे और उन चूल्हों के सहारे अपना पापी पेट भरनेवाले हम बेचारों का क्या होगा? इसलिए इस योग-वोग जैसी फालतू चीज को फैलने से रोकना बहुत ही आवश्यक है जाने क्या-क्या आसन होते हैं इस योग में अब सूर्य नमस्कार को ही लें अपने स्वार्थ के लिए किसी के तलवे चाटने से बेहतर तो नहीं हो सकता ये सूर्य नमस्कार इसलिए खासकर इस सूर्य नमस्कार का विरोध करना तो बनता ही है योग का सीधा-सीधा अर्थ है जोड़ना और हम भारतीयों के शब्दकोष से ये शब्द तो आजादी से पहले ही अंग्रेजों की कृपा से गायब हो गया था हमने इसे अपने शब्दकोष में शामिल करने का प्रयास देश के आजाद होने के बाद किया तो था पर काले अंग्रेजों के होते हुए यह संभव नहीं हो पाया, सो हमें योग शब्द से ही आपत्ति हो गयी इसलिए हम 'योगं शरणम् गच्छामि' मन्त्र की बजाय 'भोगम् शरणम् गच्छामि' मन्त्र' को ज्यादा पसंद करते हैं अब देखिये न ये जीवन चार दिनों का है और इसे चार दिन का मानकर ही भोगना चाहिए न कि योग के चंगुल में गिरफ्त होकर इसे आठ दिन का बना डाला जाएखाओ-पियो, ऐश से जियो और संभव हो तो उधार लेकर भी घी पियो क्या रखा है ज्यादा जीने में? वैसे भी कहावत है 'वीर भोग्यं वसुंधरा' अब हम वीर बेशक न हों पर वसुंधरा को भोगने की इच्छा तो रखते ही हैं और येन केन प्रकारेण अपनी भोगवादी संस्कृति को बचाए रखना चाहते हैं पर ये योगप्रेमी प्रधानमंत्री योग को अपना ब्रम्हास्त्र बनाकर हमारी भोगवादी संस्कृति को जलाकर स्वाहा करना चाहता है परमात्मा ने हमें ये कोमल सा शरीर दिया है और हम इसे योग की दुष्कर क्रियाओं के हवाले करके कष्ट प्रदान करें न बाबा न ये पाप कम से कम हमसे तो होने से रहा हम तो भोगी थे, भोगी हैं और सदैव भोगी ही रहेंगे वैसे आपको भी हमारी ये नेक सलाह है कि योग के चंगुल में न फँसें और 'योगं शरणम् गच्छामि' की बजाय 'भोगम् शरणम् गच्छामि' मन्त्र का जाप करते हुए हमारी तरह मस्त रहें     
लेखक: सुमित प्रताप सिंह
ई-1/4, डिफेन्स कॉलोनी पुलिस फ्लैट्स,
नई दिल्ली- 110049
फोन नंबर - 09818255872
कार्टून गूगल से साभार 

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