मंगलवार, 28 अप्रैल 2015

लप्रेक : प्रेमिका


 सेना की पूरी टुकड़ी में सिर्फ तीन जवान बाकी बचे थे। सामने दुश्मन की सेना की टुकड़ी मोर्चा लिए हुए थी। तीनों जवान हिम्मती इतने थे कि उनके माथे शिकन तक नहीं थी। उनमें से ही एक जवान विपिन ने हँसी-मजाक शुरू कर दिया, "यार सुजॉय हम तो आज गए समझो। मुझे तो इस बात की चिन्ता है कि हमारे बाद हमारी गर्लफ्रेंड्स का क्या होगा?"
"यार मैंने तो अपनी वाली से ऑलरेडी कह रखा है कि मुझे कुछ हो जाए तो अपने पड़ोस के चशमिश का प्रपोजल एक्सेप्ट कर लेना"। सुजॉय हँसते हुए बोला। 
सचिन ने तीसरे जवान रमेश से पूछा, "ओये तू अपनी गर्लफ्रेंड मतलब कि प्रेमिका से क्या बोल के आया था?"
"अबे यार इस खड़ूस गँवार से भला कौन लव करेगा?" सुजॉय ने मजाक उड़ाते हुए कहा।
"मेरी केवल एक ही प्रेमिका है और वो है भारत माता और उसके प्यार की खातिर मैं कुछ भी कर सकता हूँ"। इतना कहकर रमेश फुर्ती से पहाड़ी की ओट से निकला और दुश्मन सेना की टुकड़ी पर टूट पड़ा और अपनी प्रेमिका की रक्षा करते हुए शहीद हो गया।




चित्र गूगल से साभार 

शनिवार, 11 अप्रैल 2015

यमराज का न्याय (लघु कथा)



   मराज का दरबार लगा हुआ था। चित्रगुप्त प्रत्येक जीव के कर्मों का बही खाता जाँचकर यमराज को उसका पूरा विवरण देते थे और यमराज उस जीव को उसके लिए तय स्थान पर भेजने का निर्णय सुना देते थे। तभी एक जीव को पकड़कर यमदूतों ने यमराज के सामने प्रस्तुत किया।
यमराज - इस जीव ने क्या धृष्टता की है?
यमदूत - महाराज यह जीव बहुत जल्दी में लगता है। बार-बार पंक्ति बदल कर दूसरी पंक्ति में अन्य जीवों के आगे खड़ा हो जाता है।
यमराज - चित्रगुप्त देखो तो इस जीव की मृत्यु किस प्रकार हुई थी?
चित्रगुप्त - महाराज इसे अपनी पंक्ति में न रहने की बहुत पुरानी बीमारी है। यह सड़कों पर भी अपनी पंक्ति में नहीं चलता था और बार-बार अपनी पंक्ति बदलता रहता था। एक दिन इसी आदत के कारण यह एक ट्रक के नीचे आकर अकाल मृत्यु का शिकार हो गया।
यमराज - क्या इसको ट्रैफिक पुलिस के संदेश "लेन ड्राइविंग, सेफ ड्राइविंग" के विषय में ज्ञान नहीं था?
चित्रगुप्त - महाराज इसे यातायात के सभी नियमों का भली-भाँति ज्ञान था, किन्तु इसमें जल्दबाजी की सनक रहती थी।
यमराज - ठीक है तो इस दुष्ट को पृथ्वी पर फिर से भेजो। वहाँ यह ट्रैफिक पुलिस का सिपाही बनकर सड़कों पर यातायात को सुचारू रूप से चलवाने में योगदान देगा। जब यह तेज धूप में तपकर कोयले की तरह काला होते हुए व वाहनों का धुआँ पी-पीकर अपना कलेजा खोखला करते हुए यातायात में अवरोध उत्पन्न कर आतंक मचानेवाले इस जैसे आतंकियों से निपटेगा तब इसे अनुभव होगा कि इस जैसे दुष्टों के कारण पृथ्वी लोक पर मानव जाति को कितनी विपत्तियाँ और कठिनाइयाँ झेलनी पड़ती हैं।
चित्रगुप्त - जैसी आपकी आज्ञा महाराज।

कार्टून गूगल से साभार 

शनिवार, 4 अप्रैल 2015

समझदार (लघु कथा)


संजना अपनी सहेली कविता से काफी दिनों बाद मिली थी। कविता अपनी सहेली संजना के लिए रसोई में चाय बनाने में व्यस्त थी और संजना कविता के दो साल के बेटे चिंटू के साथ बतिया रही थी। चिंटू अपनी तोतली बोली में उससे बातें करने में मस्त था।
संजना से बात करते हुए अचानक चिंटू बोला, "आंटी ये पपीता फ्लिज में रख दो।"
"
क्यों बेटा फ्रिज में क्यों रख देंक्यों न इसे काटकर आपको खिला दें?" संजना ने प्यार से चिंटू के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा।"
चिंटू बोला, "आंटी इछ पपीते को चूहे ने कात कर खलाब कर दिया है। इछलिये अगल हम इछे खाएंगे तो बीमाल पड़ जाएँगे।"
तभी कविता चाय लेकर आ जाती है।
"
देखा मेरा बेटा कितना समझदार हो गया है।" कविता मुस्कुराते हुए बोली।
संजना ने हँसते हुए कहा, "हाँ इसकी बातों से लग तो ऐसा ही रहा है। अच्छा चिंटू बेटा जब ये पपीता ख़राब हो ही गया है तो आप इसे फ्रिज में क्यों रखवा रहे हैं?"
"
आंटी हमाली नौकलानी जब काम कलने आएगी तो हम उछको ये पपीता दे देंगे। इछे उछका छोता बेता खा लेगा।" चिंटू गंभीर होकर बोला।
संजना ने हैरान होकर कहा, "कविता तेरा बेटा तो कुछ ज्यादा ही समझदार हो गया है।"
*चित्र गूगल से साभार 

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