सोमवार, 10 मार्च 2014

सच्चा प्यार (कविता)


जब तू मिलेगी
किसी मोड़ पर
तो तुझे बताऊंगा 
कि तुझसे प्यार था सच्चा
फिर तू पूछेगी मुझसे
कि जो प्यार था सच्चा 
तो तू जब हुई
किसी और की
तो क्यों न झुलसा दिया
तेरा चेहरा तेजाब से
या क्यों न 
कतरा तेरा गला 
छुरे की धार से
या फिर भून क्यों न दिया
बदन को तेरे
पिस्तौल के हर कारतूस से
और मैं मुस्कुरा के कहूँगा
पगली सच्चा प्यार था
तभी तो ये सब न किया गया।


सुमित प्रताप सिंह 


इटावा, नई दिल्ली, भारत 

2 टिप्‍पणियां:

Pradeep Kashyap ने कहा…

bahut pyaari kavitaa he yeh bahut bahut dhanyavaad

SUMIT PRATAP SINGH ने कहा…

धन्यवाद प्रदीप कश्यप जी...

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...