गुरुवार, 10 जनवरी 2013

अलविदा ओ दामिनी



13 टिप्‍पणियां:

बेनामी ने कहा…

thanks u

smt. Ajit Gupta ने कहा…

दामिनियां तो जन्‍म फिर लेगी लेकिन इस बार उन्‍हें महिषासुर मर्दिनी बनना होगा। बहुत अच्‍छा प्रयास है आपका।

Kailash Sharma ने कहा…

बहुत प्रभावी और सशक्त प्रस्तुति....

ब्लॉग बुलेटिन ने कहा…

अमन की आशा या अमन का तमाशा - ब्लॉग बुलेटिन आज की ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

VIRESH ARORA ने कहा…

अरे वाह .......आपकी नयी नयी विधाओं जानकारीयां मिल रहीं रहीं है ... bahut khub sir ji.

VIRESH ARORA ने कहा…

DEKHO DESH YE JAAG RAHA HAI DAMINI, MAN KA ANDHERA BHAAG RAHA HAI DAMINI..... BAHUT HI ACHCHE BOL, BAHUT HI ACHCHI DHUN AUR SANGEET AUR SABSE ACHCHI AWAAJ........ PRASTUTIKARAN KI TO BAAT HI KYA.... AAPKI NAYI NAYI VIDHAO KEE JANKARIYA MIL RAHI HAI.... SACHMUCH JITNA AAPKE BAARE MEI JANTA JA RAHA HOON UTNA HI AAPKA DEEWANA "FAN" HOTA JA RAHA HOON...... AAPKE PRAYAS (HAR KSHTRA क्षेत्र MEI)SARAHNIYE/PRASHSNIYE HAI..... IS KSHDHANJLI GEET KE LIYE MERI BADHAI SWEEKAREN.

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

बहुत खूब..

poonam matia ने कहा…

achha pryaas Sumit.manav bhesh mei saap sabhi ko daste hain ...............sach hi hai ....badhai is pryaas hetu

Anju (Anu) Chaudhary ने कहा…

शब्द रचना सहित खूबसूरत प्रस्तुति

सुमित प्रताप सिंह Sumit Pratap Singh ने कहा…

आप सभी का इतना सारा स्नेह मिला. आप सभी का हृदय से आभार...

Vijay Wagh ने कहा…

bhot ..badiya sradhanjali h ye Damini k liye

Vijay Wagh ने कहा…

bhot ..badiya sradhanjali h ye Damini k liye

Santosh Pawar ने कहा…

भाई सुमित बहुत बढि़या गीत है। आपके गंभीर शब्द‍, आपकी भावनाएं, आपकी आवाज़ सचमुच मन को कुछ पल के लिए सुन्न कर देती है। सोचने के लिए विवश कर देती है। आपकी व्यंग्य विधा से तो हम परिचित थे, लेकिन इस तरह का प्रयोग हम पहली बार देख रहे हैं, बहुत अच्छा लगा। बहुत बहुत बधाई देते हैं ऐसे ही लगे रहो, कामयाबी ज़रूर मिलेगी।



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