मंगलवार, 7 फरवरी 2012

इंटरनेट पर गप्प मारते शिवम मिश्रा




प्रिय मित्रो

सादर ब्लॉगस्ते!

     दोस्तों आप भी कभी न कभी गप्प तो मारते ही होंगे. गप्प मारने का भी एक अलग ही आनंद है. हालाँकि पुरुष जगत इस मामले में महिला जगत से पीछे है, किन्तु इस विधा में कुछ ज्ञानी पुरुषों के प्रवेश से हम शीघ्र ही महिला जगत को पछाड़ देंगे. आइए आज आपसे मिलवाते है ऐसे ही ज्ञानी पुरुष से जिनका नाम है श्री शिवम् मिश्रा. शिवम् मिश्रा जी कलकत्ता में जन्मे और पले-बड़े (अब कितने बड़े यह तो आप स्वयं ही देख कर बताइएगा) और अब 1997 से मैनपुरी में अपनी गप्प नामक योग क्रिया में मस्त हैं. भई साफ़-साफ़ कहें तो मैनपुरी सुखचैनपुरी में आराम से ज़िन्दगी की रेल चला रहे है ... जो धीरे धीरे अपने सफ़र में चली जा रही है. एक जीवन बीमा एजेंट के रूप में कार्य कर रहे हैं तो काफी नए-नए लोगों से मिलना-जुलना भी लगा रहता है और इनकी गप्प योग क्रिया में जुड़ने हेतु कुछ नए साथी मिल जाते हैं. साथ ब्लॉगिंग के कारण भी गप्प मारने के लिए काफी नए दोस्त बने है (मतलब कि अब इन्टरनेट पर भी गप्प मारी जाएगी) ... जैसे कि हम...

     आज शिवम् मिश्रा जी के लिए विशेष दिन है (असल में विशेष दिन तो भाभी जी के लिए है किन्तु हम सभी शिवम् जी को सांत्वना देने के लिए उनका ही विशेष दिन मानकर चलते हैं). आज के ही दिन भाभी जी के हाथों द्वारा  शिवम् मिश्रा जी की कमान संभाली गई थी. वैसे आज हिंदी ब्लॉगर शिखा वार्ष्णेय जी का भी विजय दिवस है (हुज़ूर शादी की साल गिरह है) और हिंदी ब्लॉगर देव कुमार झा का पृथ्वी पर प्रकट होने का दिन है (सरकार जन्मदिन है). तो इन तीनों हिंदी ब्लॉगरों को इनके इस विशेष दिन की हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए मिलते हैं शिवम् मिश्रा जी से...

सुमित प्रताप सिंह- शिवम् मिश्रा जी नमस्कार! और कैसे हैं आप? गप्प-शप्प कैसे चल रही है?

शिवम् मिश्रा- नमस्कार सुमित जी! बिलकुल ठीक हूँ. गप्प-शप्प ठीक चल रही है. अब आप आ गए हैं तो खूब जमेगी जब मिल बैठेंगे गपोड़ी दो. (ये लो जी हमने कब गप्प मारी?)

सुमित प्रताप सिंह- जी ठीक ही कहा आपने (अब गलत भी तो नहीं बोल सकते). कुछ प्रश्न लाया हूँ आपके लिए.

शिवम् मिश्रा- अरे तो पूछो न! आज गप्प के लिए आपके प्रश्न ही सही.

सुमित प्रताप सिंह-  ब्लॉग लेखन के लफड़े आप भला कैसे फँस गए?

शिवम् मिश्रा- कुछ मत पूछो यार , एक मित्र है हमारे ... मित्र क्या भाई ही समझो ... हृदेश सिंह जी ... पत्रकार है ... आजकल हिंदी दैनिक , हिन्दुस्तान के ब्यूरो चीफ है यहाँ मैनपुरी में , उन्होंने ही इस ब्लोगिंग के चक्कर में ऐसा डाला कि अगला खुद तो आजकल असक्रिय है हमें अति - सक्रिय कर गया है ! और फिर आपको तो मालुम ही है , " यह छूटती कहाँ है एक बार मुंह को लगी हुयी " ... अब वही हाल है !!

सुमित प्रताप सिंह- सुना है कि आप गप्प मारने के बड़े शौक़ीन हैं? मैनपुरी के लोगों से आपकी बड़ी शिकायत आती रहती है. 

शिवम् मिश्रा- अरे भैया सुमित जी ... आप भी हमारे पड़ोस के ही है ... इटावा के ... आप तो जानते ही है गप्प मारना ... मैनपुरी और इटावा जैसे इलाको का प्रमुख्य रोज़गार है ... काहे कि आज़ादी के बाद से ही सब के सब नेता बाकी देश के विकास में इतना उलझ गए कि ये इलाके आज भी लगभग उसी दौर में जी रहे है ... तो जो काम तब करते थे वही आज भी कर रहे है ... गप्प मार रहे है ... क्या समझे ... ;-) रहा सवाल शिकायत आने का तो भैया जी हम बताये न १९९७ में ही तो आये है मैनपुरी ... काम सिखने में टाइम तो लगता है न जी ... ;-)

सुमित प्रताप सिंह- आपने ब्लॉग बुलेटिन नाम से एक चर्चा ब्लॉग भी बना रखा है. मतलब कि अब आप नेट पर भी ब्लॉगर बंधुओं के संग गप्प मारने लगे?

शिवम् मिश्रा- राम का नाम लो यार ... ब्लॉग जगत में हम क्या खा कर गप्प मारेंगे जी ... यहाँ तो पहले से ही सब एक से एक उस्ताद लगे हुए है ... हमने तो बस कुछ मित्रो के संग मिल कर एक ऐसा मंच तैयार करने की कोशिश की है ... जहाँ हम लोग मिल कर आप सब को ब्लॉग जगत की गतिविधियों से रूबरू करवा सकें ... और आपने तो खुद ही 'मेहमान रिपोर्टर' के तौर पर इसका अनुभव किया है कि ब्लॉग बुलेटिन टीम किस तरह नए नए प्रयोग कर रही है और सब से मज़े की बात यह है इस में हम लोगो को पूरे ब्लॉग जगत का सहयोग मिल रहा है बिना किसी भेदभाव के ... एक उदहारण देता हूँ ... ललित शर्मा जी , जो कि खुद ब्लॉग4वार्ता के नाम से एक ब्लॉग चर्चा का ब्लॉग का संचालन कर रहे है ... बहुत जल्द ही आपको बतौर 'मेहमान रिपोर्टर' उनकी पोस्ट भी पढने को मिलेगी ! सदा जी ने भी अपनी पोस्ट लगाई हुयी है वो भी नयी पुरानी हलचल पर चर्चा करती है ... यही तो मज़ा है इस ब्लॉग जगत का ... सब अलग अलग फिर भी सब एक ! और यही ब्लॉग बुलेटिन का भी मूल भाव है !

सुमित प्रताप सिंह- आपकी पहली रचना कब और कैसे रची गई?

शिवम् मिश्रा- भाई सच कहे तो हमारी पहली रचना ने २५ मार्च २००७ को सुबह ३ :२० पर रची गयी ... हमारे पुत्र कार्तिक का जन्म हुआ ... ;-) कैसे रची गयी ... यह मत पूछो ! 


अरे भाई मैं कौन सा साहित्य लिख रहा हूँ जो रचनाएँ लिखने लगा ... एक आम बंदा हूँ जो थोडा बहुत लिख लेता है ख़ास कर अपने आस पास हो रही घटनाओ पर ... और वैसे भी एक चर्चाकार के रूप में तो हम  और भी मजे में होते है ... लिखते आप लोग हो और हम उन रचनाओ को ले कर अपनी एक पोस्ट बना देते है ... मौजा हो मौजा ... है कि नहीं ...



वैसे ब्लॉग जगत की मेरी पहली पोस्ट थी 'वेदना'



अब यहाँ यह साफ़ साफ़ कह दूं कि कविता मेरी लिखी हुयी नहीं है बल्कि फिल्म 'अभय' का एक गाना है जो मुझे काफी पसंद है सो यहाँ लिख दिया !

सुमित प्रताप सिंह- लिखना क्या वाकई में इतना ज़रूरी है? वैसे आप लिखते क्यों हैं?

शिवम् मिश्रा- लिखना जरुरी है काफी जरुरी है ... जब आस पास इतना कुछ हो रहा हो तो आप कब तक चुप बैठ सकते है ... ब्लॉग लेखन ने एक मंच दिया है हम सब को अपनी अपनी बात रखने का अपने ही एक अलग अंदाज़ में !मैं भी केवल अपनी बात खुल कर कहने के इरादे से ही लिखता हूँ ... और एक अन्दर की बात यह है कि आजकल बोलने में खतरा ज्यादा है सो लिखने में ही भलाई है ... क्या समझे ???

सुमित प्रताप सिंह- लेखन में आपकी प्रिय विधा कौन सी है?

शिवम् मिश्रा- यार फिर वही दिक्कत में डाल रहे हो आप ... इतना हमको नहीं मालुम भाई कि हम किस विधा में लिखते है हम तो सिर्फ अपने दिल की बात लिखते है ... कौन की विधा है यह आप तय करो. 
(हे प्रभु अब यह काम भी हमारे मत्थे ही मढ़ दिया शिवम जी ने ).

सुमित प्रताप सिंह- अपनी रचनाओं से समाज को क्या संदेश देना चाहते हैं?

शिवम् मिश्रा- मेरे लिए देश सब से बड़ा है और यही मेरी कोशिश रहती है कि यही भावना मैं अपनी पोस्ट के माध्यम से लोगो तक पहुंचा पाऊँ... अगर मेरी पोस्ट को आप मेरी रचना माने तो यही मेरा सन्देश है ! 

सुमित प्रताप सिंह- एक अंतिम प्रश्न. "ब्लॉग पर हिंदी लेखन और ब्लॉग चर्चा मंच?"  इस विषय पर आप अपने कुछ विचार रखेंगे?

शिवम् मिश्रा- काहे भैया इतनी जल्दी अंतिम प्रश्न (शिवम् जी जानते हैं कि हम लघु कथाकार है फिर भी यह प्रश्न.. क्या बोलूँ?) ... खैर कोई बात नहीं ...आज के दौर में जब समय का काफी अभाव है लोगो के पास ऐसे में अगर आप थोडा समय अपने लिए निकाल कर ब्लोगिंग कर सकते हो तो इस से अच्छा कुछ नहीं ... एक तो कुछ बढ़िया करने का सुकून मिलता है दूसरा आप अपने मन की बात अपने ही अंदाज़ में ब्लॉग के मार्फ़त लिखते हो तो आप जैसे बहुत से लोगो को भी यह मौका मिलता है कि वो भी इस विधा में अपना हाथ आजमायें ... नतीजा कुल मिला कर यह कि हिंदी में लिखने वालों की संख्या में इजाफा होता है साथ साथ जो लोग पहले से लिख रहे है उनको नए नए पाठक मिलते है ... एक तरह से अपने अपने अंदाज़ में हम हिंदी की कुछ न कुछ सेवा कर ही लेते है ... और इस से बड़ी क्या बात हो सकती है !
रहा सवाल ब्लॉग चर्चा मंचो का तो हर एक ब्लॉग चर्चा मंच यही सोच कर अस्तित्व में आता है कि वो हिंदी ब्लॉग के पाठको को नयी नयी पोस्टो कि जानकारी देगा ... हर एक का अपना अपना एक अलग अंदाज़ होता है कारण साफ़ है हर चर्चा मंच में अलग अलग शैली में लिखने वाले ब्लॉगर है तो उनका प्रभाव पोस्टो पर तो आना ही है ... नतीजा यह कि पाठको को रोज़ एक नए अंदाज़ में नयी नयी पोस्टो कि जानकारी मिल जाती है ... आज जब ब्लोगवाणी या चिट्टाजगत जैसे अग्रीगेटर बंद हो चुके है इन चर्चा मंचो पर ज़िम्मेदारी और ज्यादा आ गयी है ... अब यह बात और है कि कौन कौन अपनी ज़िम्मेदारी कैसे और कितनी निबाह रहा है !हाँ एक चर्चाकार के तौर पर मेरा खुद का यह प्रयास रहता है कि मैं अपने पाठको को ज्यादा से ज्यादा लिंक्स दे सकूँ पढने के लिए अब मैं आपने प्रयास में कितना सफल होता हूँ यह तो आप ही बता सकते है !


(आज के लिए इतनी ही गप्प काफी लगी... ओहो यह क्या लिख डाला?...सो शिवम् मिश्रा जी अपने अन्य साथियों संग भी गप्प मारने के लिए छोड़कर हम भी निकल पड़े कहीं और गप्प मारने को... हा हा हा भला  सच भी छिपाए छुपता है क्या?) 

शिवम् मिश्रा जी के संग गप्प-शप्प करनी हो तो पधारें http://burabhala.blogspot.in/  पर...

15 टिप्पणियाँ:

अविनाश वाचस्पति ने कहा…

आप क्‍या कह रहे हैं हजूर सुमित प्रताप सिंह जी
अभी सुबह सवेरे तो वे जयपुर में धरे गए हैं
हमने ही पकड़ा है
पूछा दिल्‍ली होकर जाओगे
या हवा में से ही सर्र सर्राते हुए निकल जाओगे
तो वे बोले
जयपुर से आगरा और आगरा से मैनपुरी
मतलब सुखचैनपुरी
पर यह आगरा किसलिए होकर जा रहे हैं
क्‍या अपनी गप्‍पबाजी की कला पर धार
लगवाने के लिए
वे अक्‍सर आगरा आते आते रहते हैं
अभी तो वे जयपुर में धूम मचा रहे हैं
धूम दो और धूप दो
वे आगरा में मचाएंगे/सिकाएंगे
और धूम थ्री
मैनपुरी जी।

रश्मि प्रभा... ने कहा…

शिवम् भाई ... गप्प कहिये या स्नेहिल अंदाज कहिये , प्रभुत्व भी है , सबके साथ एक स्नेह संबंध भी है - यही तो है ब्लॉग बुलेटिन का प्रभाव

दिगम्बर नासवा ने कहा…

वाह ... गप्पों का भी अपना ही मज़ा है ...
तीनों को बधाई विशेष दिन की ...

Vibha Rani Shrivastava ने कहा…

दुल्हन और शिवम् भाई को शादी-सालगिरह की ढेरों बधाई और हार्दिक शुभकामनायें.... !!
गप्प कहिये या स्नेहिल अंदाज ,मैनपुरी में धूम मचा रहे हैं.... !!

पद्म सिंह ने कहा…

आम आदमी का खास परिचय पढ़ कर आनंद आया... वैसे ये महाशय की गहराई इस पोस्ट से कहीं अधिक है... फिर भी भाभी जी के विजय दिवस पर भाभी जी ही बधाई की पात्र हैं... शिवम भाई को तो हम शुभ कामना ही दे सकते हैं

shikha varshney ने कहा…

बढ़िया रोचक वार्ता है .शिवम जी को वैवाहिक वर्षगाँठ की बहुत बहुत बधाई.

सदा ने कहा…

वाह...बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ...बधाई के साथ शुभकामनाएं ।

रवीन्द्र प्रभात ने कहा…

जहां गप्प नहीं
वहां ब्लॉगिंग कैसी ?
अच्छी हो प्रस्तुति-
चाहे ऐसी,वैसी,जैसी !
यह साक्षात्कार है-
सत्यम -शिवम्-सुन्दरम
जिसमें खुशबू है मैनपुरी की
मधुरम-मधुरम-मधुरम...!

संगीता तोमर Sangeeta Tomar ने कहा…

आज की गप्प का विषय अच्छा रहा.
बंधन दिवस,विजय दिवस व प्रकट दिवस की आप तीनों को शुभकामनाएँ.

अजय कुमार झा ने कहा…

वाह वाह मिसर जी को उनके मुंह से जानना बढिया लगा । बडे ही गहरे और असरदार हैं ई आम आदमी । भविष्य के लिए उन्हें शुभकामनाएं

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

आज 12/02/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर (सुनीता शानू जी की प्रस्तुति में) लिंक की गयी हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

रोचक चर्चा...

MOHAN KUMAR- 9811625224 ने कहा…

glad to know that people also started boasting on net and about shivam mishra.

शिवम् मिश्रा ने कहा…

सुमित जी आपका बहुत बहुत आभार ... आपने इस नाचीज़ को भी ख़ास बना ही दिया !मैं जयपुर गया हुआ था सो पहले आना ना हो पाया !
सभी मित्रो का भी बहुत बहुत धन्यवाद ... बस आपका सब का स्नेह ऐसे ही बना रहे यही दुआ है !

सुमित प्रताप सिंह Sumit Pratap Singh ने कहा…

आप मानवरुपी चीज हैं तो नाचीज कैसे हुए.
हम सभी कामना करते हैं कि आप यूँ ही इंटरनेट के माध्यम से गप्प नामक विधा को विकसित करते रहें...
शुभकामनाएँ...

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