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शुक्रवार, 20 जनवरी 2012

सूरत बिगाड़ते सुरेश शर्मा



प्रिय मित्रो

सादर ब्लॉगस्ते!

           साथियो आप सभी को याद होगा कि बचपन में कार्टून फिल्मों के आप और हम कितने दीवाने थे और कार्टून फिल्म देखना हमारे जीवन की दिनचर्या थी. बिल्लू, पिंकी, साबू और चाचा चौधरी जैसे कार्टूनी अवतारों की कॉमिक्स कितना आनंद देती थीं उन दिनों. आज आपसे मिलवाने जा रहा हूँ अपने कार्टूनों से सबको हँसाने वाले कार्टूनिस्ट सुरेश शर्मा जी से. सुरेश शर्मा जी का जन्म बिहार राज्य के मुंगेर नामक स्थान पर हुआ. इन्होंने बहुत छोटी उम्र से ही कार्टून बनाना आरंभ कर दिया था. जब यह पढ-लिख गए तो इनके माता-पिता से इनकी आज़ादी बर्दाश्त न हुई और इनका विवाह कर इन्हें श्रीमती सुरेश शर्मा (हमारी भाभी जी) के अंतर्गत नियुक्त कर दिया गया. विवाह के उपरान्त भाभी जी के साथ सुरेश शर्मा जी रांची (झारखण्ड) में बस गए (या फिर भाभी जी की आज्ञानुसार बसना पड़ा. हो सकता है उनके डर से बसे हों. अब आप जो भी समझें). बचपन से कार्टून बनाने के प्रति इनका इतना अधिक लगाव रहा कि आगे चलकर इनके कार्टून ही इनकी पहचान बन गए.

सुमित प्रताप सिंह- सुरेश शर्मा जी नमस्कार! कैसे हैं आप?

सुरेश शर्मा- जी सुमित जी ठीक-ठाक हूँ. आप अपनी सुनाएँ.

सुमित प्रताप सिंह- जी मैं भी ठीक-ठाक हूँ. कुछ प्रश्न लाया हूँ आपके लिए.

सुरेश शर्मा- अब प्रश्न ले ही आये हो तो पूछ डालो.

सुमित प्रताप सिंह- आप इस ब्लॉग नामक भंवर में कब और कैसे फँसे?

सुरेश शर्मा- आज से चार साल पहले ब्लॉग क्या बला है यह मुझे पता भी न था, कार्टूनिस्ट कृतीश भट्ट के प्रेरित करने पर मैंने  ब्लॉगिंग शुरू की और अब ब्लॉग जगत में मेरी भी कुछ पहचान बन गई है.

सुमित प्रताप सिंह- प्रकृति द्वारा निर्मित किसी भी आदमी के अच्छे-खासे चेहरे को आप क्या बना डालते हैं. आपको ऐसा करते हुए उस मासूम पर दया नहीं आती?

सुरेश शर्मा- कार्टून शब्द ही ऐसा है जिससे यह पता चल जाता है की जब किसी को कार्टून की शक्ल में ढाला जायेगा तो उसकी शक्ल क्या होगी ..मुझे किसी का चेहरा बिगाड़ने में कोई बुराई नजर नहीं आती है ..आप खुद जब कार्टून की शक्ल में अपना चेहरा देखोगे तो अपने आप पर मुस्कुरा उठोगे ..इस कला की यही तो पूँजी है.
(जब बनेगा तभी तो मुस्कराएँगे. जाने कब सुरेश जी मेरा कार्टून बनाएंगे?)

सुमित प्रताप सिंह- आपने अपना पहला कार्टून कब और क्यों बनाया?

सुरेश शर्मा- मेरा पहला कार्टून हास्य पत्रिका मधु मुस्कान में प्रकाशित हुआ. यह प्रयास मेरे स्वर्गीय पापा के प्रोत्साहन से सफल हुआ ..और उन्ही की प्रेरणा से मैंने पहला कार्टून बनाया और आज एक कार्टूनिस्ट के रूप में पहचाना जाता हूँ.

सुमित प्रताप सिंह- आप कार्टून बनाते क्यों हैं?

सुरेश शर्मा- समाज में फैले भ्रष्टाचार, लूट खसोट, को देख मन आक्रोशित हो जाता है तब मैं इनका विरोध अपने कार्टूनों के माध्यम से करने को बाध्य हो जाता हूँ. 

सुमित प्रताप सिंह- किस विषय पर कार्टून बनाना आपको सबसे प्रिय है?

सुरेश शर्मा- राजनीति में भ्रष्टाचार, सामाजिक कुरीतियाँ, इन विषयों पर कार्टून बनाना मुझे पसंद है.

सुमित प्रताप सिंह- अपनी कार्टून रचनाओं से समाज को क्या सन्देश देना चाहते हैं?

सुरेश शर्मा- समाज के सामने भ्रष्टाचार को बेनकाब कर मेरे मन को सुकून मिलता है. मैं अपने कार्टून के माध्यम से आम जनता को समाज के प्रति देश के प्रति जागरूक होने का सन्देश देता आया हूँ और आगे भी ये सिलसिला जारी रखूँगा.

सुमित प्रताप सिंह- एक अंतिम प्रश्न. "ब्लॉग लेखन द्वारा हिंदी का विश्व में प्रचार और प्रसार."  इस विषय पर क्या आप अपने कुछ विचार रखेंगे?

सुरेश शर्मा- ब्लॉग लेखन हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए एक सशक्त भूमिका निभा सकता है, अतः हमें हिंदी ब्लॉग लेखन को प्रोत्साहित करना ही चाहिए. 

(इतना कहकर सुरेश शर्मा जी अपना पैन और कागज़ उठाकर कुछ बनाने लगे. मैंने अनुमान लगाया कि शायद मेरा कार्टून बनाया जा रहा है, किन्तु वह तो कुछ और ही बनाने में मस्त थे. उन्होंने वादा किया कि वह एक दिन मेरा भी कार्टून बनाकर मुझे हंसाएँगे. कहीं उनका वादा चुनावी वादे जैसा न निकले?)

सुरेश शर्मा जी के कार्टून देखकर मुस्कराना हो तो पधारें http://sureshcartoonist.blogspot.com पर...

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