शनिवार, 14 जनवरी 2012

सुरेश यादव की चिमनी पर टंगा चाँद


प्रिय मित्रो

सादर ब्लॉगस्ते!

     आप सभी को अपने परिवार, रिश्तेदारों, पड़ोसियों व सभी दोस्तों-दुश्मनों के साथ बीती लोहड़ी और आगामी मकरसंक्रांति की ह्रदय से हार्दिक शुभकामनाएँ. साथियो क्या आप जानते हैं कि दिल्ली नगर निगम कब आस्तित्व में आया. नहीं जानते? चलिए हम किसलिए हैं? दिल्ली नगर निगम संसदीय क़ानून के अंतर्गत 7 अप्रैल, 1958 में आस्तित्व में आया. दिल्ली की पहली निर्वाचित मेयर थीं अरुणा आसफ अली और लाला हंसराज गुप्ता ने प्रथम मेयर के रूप में अपनी सेवा दी.आज आपकी मुलाक़ात करवाने जा रहे इसी दिल्ली नगर निगम में अतिरिक्त उपायुक्त पद पर कार्यरत सुरेश यादव जी से. जो दिल्ली नगर निगम की सेवा करते हुए हिंदी साहित्य की सेवा में भी कर्मठता से लगे हुए हैं.
     सुरेश यादव जी जिला मैनपुरी के एक गाँव से आकर 1973 -74 ई. में दिल्ली में जमने की कोशिश कर रहे थे तभी से कही न कही कविताओ में भी खुद को पा रहे थे. 1981 ई. में इनकी "उगते अंकुर" नामक काव्यकृति प्रकाशित हुई. चार साल के अंतराल के पश्चात 1985 ई.में "दिन अभी डूबा नहीं" नामक दूसरी काव्यकृति प्रकाशित हाई और इसे हिंदी अकादमी, दिल्ली की ओर से सम्मान मिला. इनकी तीसरी काव्यकृति "चिमनी पर टंगा चाँद " 2010 ई. में प्रकाशित हुई. इस कृति को "भवानी प्रसाद मिश्र सम्मान" दिया गया. इन्हें लेखन हेतु "डॉ. रांगेय राघव सम्मान" सहित कई सम्मान समाज ने दिए है. रेडियो एवं दूरदर्शन पर भी यह काव्यपाठ करते रहते हैं. मज़े की बात यह है कि इन्हें हमारी तरह छपने का चस्का बिलकुल भी नहीं है और इन्होंने अखबारों तथा पत्रिकाओ को केवल माँगने पर ही रचनाए दी हैं.

सुमित प्रताप सिंह- आपको यह ब्लॉग लेखन का विचार कब और कैसे आया?

सुरेश यादव- अक्टूबर 2006 में जब पहली बार "अनुभूति" में मेरी रचनाए प्रकाशित हुई और मैंने देश विदेश से अपनी रचनाओ पर प्रतिक्रियाए पाईं इस सुखद अनुभूति ने मुझे प्रेरित किया.भाई सुभाष नीरव की प्रेरणा ने मुझे ब्लॉग रचनाकार बनाया और उसके बाद बहुत सारे मित्र हैं और सहयोग देने को तत्पर तो सुमित जी आप भी हैं.

सुमित प्रताप सिंह- आपकी पहली रचना कब और कैसे रची गई?

सुरेश यादव- .मेरी पहली रचना 1973 ई.में रची गई जब मैं छुट्टी पर अपने गाँव गया था . यह एक प्रणय गीत ही था जिसे मैंने शर्म से किसी को नहीं सुनाया.

सुमित प्रताप सिंह- आप लिखते क्यों हैं?

सुरेश यादव- .यह प्रश्न बहुत बड़ा है और लगभग ऐसा ही है जैसे कोई पूछे कि आप जीवन क्यों जीते है? लिखने का कारण कभी खोजा नहीं परन्तु महसूस करता हूँ कि अपने आप को अभिव्यक्त करने के लिए, अपने समाज से सरोकार बनाए रखने के लिए,जीवन-चिंतन तथा समाज के अभावों की पूर्ति के लिए और अंत में बेचैन सवालों के द्वारा विवशता वश भी कविता लिख जाता हूँ . लेखन जिसमें कविता के अलावा कहानियां ,लघु कथाएँ, समीक्षाएं आदि हैं. उनके लिखने का कारण भी यही है. सच तो यह है कि जितना मैं साहित्य रचता हूँ, साहित्य भी मुझे उतना ही रचता है और यह सिलसिला ज़ारी रहता है. कष्ट में सुख की अनुभूति केवल रचना करवा सकती है इसलिए वह मेरा जीवन है .

सुमित प्रताप सिंह- लेखन में आपकी प्रिय विधा कौन सी है?

सुरेश यादव- कविता मेरी प्रिय विधा है. यद्यपि मैंने कहानी,लघु कथा, ग़ज़ल, मुक्तक, दोहे, हायकू भी लिखे हैं और साहित्य समाज ने पसंद किए हैं.

सुमित प्रताप सिंह- अपनी रचनाओं से समाज को क्या सन्देश देना चाहते हैं?

सुरेश यादव- कोई भी रचना सन्देश से अधिक एहसास दिलाती है कि हम सब के बीच कहीं न कहीं विचारों और भावनाओं की समानता है जो मानवीय एकता को स्थापित करती है. यह एहसास ही सन्देश बन जाता है कि तमाम मानवता के बीच साझा चिंताए भी हैं. मैं अपने समाज को यह सन्देश भी देना चाहता हूँ कि सच्चाई, ईमानदारी और मानवता के हक़ में मेरी रचनायें खड़ी है तथा मानवीय संवेदनायें अभी जीवित हैं. आस्था और विश्वास का सन्देश मेरा प्रमुख सन्देश हैं.

सुमित प्रताप सिंह- एक अंतिम प्रश्न. "ब्लॉग लेखन हेतु भी एक आचार संहिता तथा एक निश्चित आयु सीमा होनी चाहिए." इस विषय पर क्या आप अपने कुछ विचार रखेंगे?

सुरेश यादव- ब्लॉग लिखने को मैं उसी तरह मानता हूँ कि जैसे कोई किसी पत्रिका का संपादन कर रहा हो अथवा अपनी स्वयं की रचनायें रच रहा हो. कोई किसी के नाम से ब्लॉग में कुछ भी लिख दे ठीक नहीं है. अपनी पूरी पहचान के साथ प्रामाणिक रूप में ही ब्लॉग रचनाकार को आना चाहिए. जहाँ तक आयु का सम्बन्ध है निर्धारित करना संभव नहीं है, परिपक्वता का आधार होना चाहिए, फिर भी यदि 13 -14 वर्ष से आयु कम न हो तो अच्छा है.

(इतना कहकर सुरेश यादव जी अपनी चिमनी की ओर निहारने लगे. मुझे लगा कि शायद चाँदरुपी कोई नई रचना उनके मस्तिष्क में प्रवेश करने को राह तक रही है. सुरेश यादव जी और उनकी नई रचना के मिलन में बाधा न बनूँ, सो मैं निकल लिया अपने अगले पड़ाव की ओर)

सुरेश यादव जी की चिमनी पर टंगा चाँद देखना हो तो पधारें http://sureshyadavsrijan.blogspot.com/ पर...


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