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शनिवार, 17 दिसंबर 2011

स्नेह पुरी की इंदु पुरी


प्यारे मित्रो

सादर ब्लॉगस्ते!

लो जी फिर से हाजिर है आपका मित्र सुमित प्रताप सिंह ब्लॉग संसार के एक और व्यक्तित्व से आपकी भेंट करवाने. जी हाँ इनका नाम है इंदु पुरी. इंदु पुरी जी बहुत स्वाभिमानी नारी हैं और जरा सा कोई बदतमीजी से बात कर ले या तू कह दे उसे ब्लाक कर देती हैं हमेशा के लिए.व्यक्तिगत जीवन मे ऐसी नही हैं.बहुत भावुक, रिश्तों को जीने वाली,प्यार देने और लेने वाली औरत हैं ये. हाँ दोस्तों का सर्कल बहुत छोटा है.पर....खूब ठोक पीट बजाकर देखने के बाद जिन्हें इन्होने अपने जीवन मे आने दिया वो इनके यह संसार छोड़ने के बाद ही इनसे अलग होंगे.क्या कहें ऐसिच हैं ये.इनका जन्म इलाहाबाद मे हुआ था.इनके पिता एयर फ़ोर्स ऑफिसर थे वहाँ.चार भाइयों के बाद गंगा मैया की मनौती रखने के बाद इनके पापा-मम्मी को यह 'सैम्पल' प्राप्त हुआ था. इसलिए परिवार मे सबसे छोटी और एक मात्र लड़की थी.उपर लिखे 'गुणों' का विकास भी शायद इसी कारण हुआ होगा.पढ़ने मे शुरू से बहुत अच्छी थीं. स्कूल मे (कक्षा मे नही)पहला या दूसरा स्थान हमेशा आता था. स्कूल मे बैस्ट स्टूडेंट, बैस्ट सिंगर, बैस्ट ओरेटर, बैस्ट डिबेटर के खूब इनाम पाए.गोल्डन पीरियड जिया इन्होने अपने स्कूल कॉलेज लाइफ का. सबकी लाडली रही.पढ़ने का बहुत शौक था.स्कूल लाइब्रेरी मे कई नई किताबों के पृष्ठ भी इन्होने अलग किये.वहीँ हिंदी,अंग्रेजी,उर्दू,संस्कृत, रुसी और विश्व साहित्य की श्रेष्ठ कई किताबे पढ़ी.इनकी पहली सहेली फर्स्ट इयर मे बनी.यूँ सबसे दोस्ती थी और ..किसी से भी दोस्ती नही थी.

सुमित प्रताप सिंह- इंदु पुरी जी सादर ब्लॉगस्ते! कैसी हैं आप? आपसे लिये कुछ प्रश्न लेकर आया हूँ.

इंदु पुरी- ब्लॉगस्ते बाबु! में तो अच्छी भली और अपने जीवन में मस्त हूँ. तुम अपनी कहो. और जो प्रश्न लेकर आये हो उन्हें बेझिझक पूछ डालो.

सुमित प्रताप सिंह- आपकी पहली रचना कब और कैसे रची गई? और आपको ये ब्लॉग लेखन का रोग कब और कैसे लगा?

इंदु पुरी-याद नही पहली कविता कब लिखी पर.. कविता प्रतियोगिताओं मे मैंने हमेशा अपनी लिखी कविताये पढ़ी और प्रथम पुरस्कार पाए.
मैंने शादी के बाद बी.ए. और एम.ए. हिंदी और अंग्रेजी साहित्य मे किया.बी.एड. की.बाद मे भी यह दोनों विषय मेरे पसंदीदा रहे और आज भी हैं.
समाज सेवा के कामों के चस्के ने मुझे कई पत्रकारों से जोड़ा. (ये शहर के नामी गिरामी लोगों को जानते हैं और अच्छे कामों के लिए किसी की भी मदद लेने मे समर्थ होते है बेशक) द्दैनिक भास्कर के कीर्ति राणा जी से फोन पर ही मुलाक़ात हुई.उन्होंने कहा मैं अपना ब्लॉग बनाऊँ.लिखूं. उनकी प्रेरणा से आ गई ब्लॉग की दुनिया मे.हा हा हा

सुमित प्रताप सिंह- आप लिखती क्यों हैं?

इंदु पुरी-कोई क्यों लिखता है? मैं क्यों लिखती? नही मालूम.
बस लिखती हूँ.जब लिखने का मन करता है खुद को नही रोक पाती.
जिस रास्ते को मैंने चुना वो काँटों भरा जरूर है पर उसमे दिलीसुकून है बस उसी से लोगों को जोड़ने के उद्देश्य से भी लिखती हूँ.

सुमित प्रताप सिंह- लेखन में आपकी प्रिय विधा कौन सी है?

इंदु पुरी-कविता,कहानी,संस्मरण,यात्रा वृत्तांत पढ़ना पसंद है.लिखती संस्मरण और कवितायें ही हूँ.

सुमित प्रताप सिंह- अपनी रचनाओं से समाज को क्या सन्देश देना चाहती हैं?

इंदु पुरी- संदेश??? लोगों ने गौतम गांधी ,बुद्ध के संदेशों को भुला दिया.
फिर भी .......मैं,मेरा घर, मेरे बच्चे,मेरा परिवार से परे जरा सा सोचे.समय दे.मन को असीम शांति देते हैं कुछ काम.वो करें. कम से कम ईश्वर को बता सके कि तुने 'इंसान' बनाकर भेजा.हम सचमुच मे 'इंसान' बनकर जीये. है ना?
प्यार कीजिये प्यार ईश्वर और उसकी आराधना का ही दूसरा नाम है.प्यार खुद से, अपनों से, जो इससे वंचित है उनसे, काम से .
प्यार है तो हम अपना बेस्ट देंगे. किसी के लिए द्वेष,नाराजगी,घृणा नही रहती.जिंदगी और दुनिया खूबसूरत लगने लगती है और....... मन मे एक असीम शांति हल्कापन समां जाता है.कभी भी यूँ ही यहाँ से चल देने का भय मन मे नही रहता.

सुमित प्रताप सिंह- एक अंतिम प्रश्न आपके भीतर सबके लिए इतना स्नेह और मिठास कैसे है? कहीं आपको मधुमेह तो नहीं है? इंदु जी इश्माइल.

इंदु पुरी- कोई अच्छाई नही मुझ मे सिवाय प्यार भरे इस खूबसूरत दिल के .ईश्वर ने इसे बहुत प्यारा बनाया है.इसमें छल कपट नही.दाँव पेच नही.सबको बहुत बहुत प्यार करता है और अपने दुश्मन का भी बुरा नही चाहता. हां रे बबुआ! मधुमेह है मुझे. तभी तो अपने प्यार के मधु का मेह बरसाती हूँ.यही तो एक ढंग की चीज है मेरे पास.हा हा हा अरे यह सब तो ठीक है. मेरा ब्लॉग पढिये .फोलो करिये. जहाँ सहमत नही बिंदास लिखिए.हा हा हा और कुछ??? बहुत है ना?

सुमित प्रताप सिंह- हाँ इस बहुत कुछ के लिये धन्यवाद.

इंदु पुरी-और इस धन्यवाद के लिये तुम्हे मेरा स्नेह और आशीर्वाद.

इंदु पुरी जी को पढ़ने के लिये पधारें http://uddhv-moon.blogspot.com/ पर...
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